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पर्युषण दया व दान का पर्व: साध्वी संस्कारनिधि

वीवी पुरम में प्रवचन

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बेंगलूरु. वीवी पुरम स्थित सीमंधर शान्तिसूरि जैन संघ में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन साध्वी संस्कारनिधि ने प्रवचन देते हुए कहा कि पर्युषण दिल, दया एवं दान का पर्व है। वर्ष भर में ३५२ दिन वित्त-अर्जन के लिए होते हैं, और आठ दिन चित्त-सर्जन के लिए होते हैं। एक पवित्र चित का सर्जन, प्रसन्न चित का सर्जन ही नहीं, पुण्योपार्जन करने वाले चित्त का सर्जन भी इन दिनों में करना है।

साध्वी ने कहा कि इस संसार में लोगों के साथ हमारे सम्बन्ध तीन प्रकार के होते हैं - आवश्यक, आकर्षक, एवं आत्मीय। घर-दुकान-ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी आवश्यक वाली श्रेणी में आते हैं उन्हें प्रतिमाह वेतन मिलता है।

कंपनी अथवा ऑफिस में कार्य करने वाला मैनेजर आकर्षक की श्रेणी में आता है, उसे भी प्रतिमाह बड़ा वेतन मिलता है और पिता का सम्बन्ध अपने बेटे के साथ आत्मीय होता है, उसे पिता की संपूर्ण विरासत प्राप्ति होती है। संघ एवं साधर्मिक के साथ हमारा सम्बन्ध आत्मीय होना चाहिए ।