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सांस्कृतिक समारोह में छलके काव्य व संगीत के रस

अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था का आयोजन

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abhyuday

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बेंगलूरु. संवेदना को झकझोर कर आंख नम करने वाली तो कभी गुदगुदाकर ठहाके लगाने पर मजबूर करने वाली कविताएं, नृत्य पर थिरकते कदम, पुस्तक विमोचन और संगीत की स्वर लहरियों के साथ अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था ने सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया। संस्था की ओर से 2021 के लिए घोषित 21 पुरस्कारों में से अभ्युदय अन्तरराष्ट्रीय सौदामिनी वेंकटेश सम्मान गायिका संगीता जानी को दिया गया। मुख्य अतिथि एस.सी.परशुरामपुरिया व द्वितीय सत्र में बिशप कॉटन वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष विनय कुमार यादव रहे।

दो सत्रों में आयोजित उत्सव की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.प्रेम तन्मय व गजलकार कमलकिशोर राजपूत ने की। इस अवसर पर डॉ.कविता शास्त्री द्वारा अनूदित ‘काव्या’ का अंग्रेजी अनुवाद व डॉ.आर. उमा शर्मा द्वारा अनूदित तेलूगु अनुवाद व उनकी ‘99 चटनी एण्ड फैक्ट्स’ कुकरी बुक तथा चन्दा प्रह्लादका के खण्ड काव्य ‘यशोधरा’ का लोकार्पण हुआ। इस विषय में डॉ. प्रेम तन्मय, कमल किशोर राजपूत व प्रकाश माधवानी ने विचार रखे। शाीय संगीत गायिका सौदामिनी वेंकटेश, भागलपुर की वरिष्ठ कवयित्री डॉ.सरिता पाण्डेय, शब्द साहित्यिक संस्था की संस्थापक सरोजा व्यास व समाजसेवी प्रकाश माधवानी ने विशिष्ट अतिथि की भूमिका निभाई। प्रेमचन्द की ‘बूढ़ी काकी’ कहानी का मंचन बनारस की अभिनेत्री डॉ. मंजरी पाण्डेय ने ज्योति तिवारी व भावना मावंडिया के साथ किया, जिसकी सूत्रधार डॉ.इन्दु झुनझुनवाला रहीं। डॉ. मंजरी के स्वाभाविक अभिनय ने सभी की आंखों में आंसू ला दिए।

काव्य महोत्सव में कवयित्री कोलकता की चन्दा प्रह्लादका, बनारस की डॉ.मंजरी पाण्डेय, डॉ संगीता श्रीवास्तव, डॉ.रचना शर्मा, भागलपुर की डॉ.सरिता पाण्डेय के साथ बेंगलूरु के सुनील जैन तरूण, ज्ञानचन्द मर्मज्ञ, कमल किशोर राजपूत, डॉ प्रेम तन्मय, अजय कुमार यादव, अंजना चाण्डक आदि ने भी काव्य पाठ कर दर्शकों को आह्लादित किया। देवा नाहटा ने डॉ.इन्दु झुनझुनवाला द्वारा रचित गांधारी की आत्मव्यथा कविता का मंचन और भरतनाट्यम की सौन्दर्य पूर्ण प्रस्तुति कर सभी को विस्मयविमुग्ध कर दिया। सौदामिनी वेंकटेश की शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति ने माहौल में सुरों की सरिता प्रवाहित की।

प्रांतीय परिधानों का सौन्दर्य कार्यक्रम में डॉ. कविता शास्त्री ने अपनी वेषभूषा और प्रस्तुति द्वारा कर्नाटक की संस्कृति को प्रस्तुत किया। डॉ. आर उमा शर्मा, डॉ.भूमिका, डॉ.उषा श्रीवास्तव, ज्योति तिवारी, पल्लवी शर्मा, संतोष भाऊवाला आदि ने जहां विभिन्न राज्यों की वेषभूषा की प्रस्तुति दी वहीं भारत माता के रूप में डॉ.इन्दु तिरंगे दुपट्टे के साथ प्रस्तुत हुईं। प्रथम सत्र का संचालन अंजना लखोटिया व दूसरे सत्र का संचालन अंजना चाण्डक ने किया। अंत में झुनझुनवाला ने आभार जताया।

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