
बेंगलूरु. कोविड मरीजों के लिए 80 फीसदी बिस्तर आरक्षित करने के राज्य सरकार के निर्देश के बाद प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन (पीएचएएनए) और सरकार के बीच ठन गई है। पीएचएएनए इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
पीएचएएनए (The Private Hospitals and Nursing Homes' Association) के अध्यक्ष डॉ. एच. एम. प्रसन्न ने कहा कि राज्य सरकार ने गत वर्ष उपचार किए गए मरीजों के पूर्ण शुल्क का भगुतान अब तक नहीं किया है। अब 80 फीस्दी बिस्तर देने के बाद निजी अस्पतालों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक ऐसे ही आदेश को रद्द किया है।
गत वर्ष कर्नाटक के निजी अस्पतालों ने सरकारी मरीजों के लिए 50 फीसदी बिस्तर दिए थे। बेंगलूरु के अस्पतालों को उपचार का लगभग 60-70 फीसदी भुगतान ही हुआ है। सरकार पर पूरे राज्य के अस्पतालों का करीब 50 फीसदी बकाया है। टीयर दो और तीन शहरों के मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पताल सर्वाधिक प्रभावित हैं।
जिन मामलों में हाई डिपेंडेंसी यूनिट के लिए बिल जमा किया गया उन मामलों में केवल जनरल वार्ड के लिए भुगतान हुआ। कई और अनियमितताएं भी हैं। सुनवाई के लिए मंच तक नहीं है।
महामारी के दौरान भी बिल और डिस्चार्ज समरी के आधार पर उपचार शुल्क भुगतान न कर सरकार एक-एक मरीज की केस फाइल की समीक्षा करना चाहती है। बिल की राशि कितनी भी हो, सरकार प्रतिदिन अधिकतम 200 बिलों का ही भुगतान करती है।
पीएचएएनए स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा मंत्री के. सुधाकर व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर प्रधान सचिव जावेद अख्तर को कई बार समस्या से अवगत कराया गया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
डॉ. प्रसन्ना ने बताया कि 50 फीसदी बिस्तर नहीं दे पाने के कारण बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका ने करीब 66 निजी अस्पतालों पर जुर्माना भी लगाया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निजी अस्तपालों के 80 फीसदी बिस्तर देते ही बेंगलूरु में कोविड मरीजों के लिए करीब 7000 बिस्तर उपलब्ध होंगे। लेकिन, यह सच नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कॉर्पोरेट अस्पतालों ने उपलब्ध बिस्तरों की गलत जानकारी दी है।
डॉ. प्रसन्ना ने बताया कि अस्पतालों को 50 फीसदी बिस्तर देने में कोई परेशानी नहीं है। 80 फीसदी बिस्तर देना असंभव है। अस्पताल 30 फीसदी बिस्तर खुद से अस्पताल पहुंचने वाले के लिए रखना चाहते हैं। वैसे मरीज भी हैं जो अपना उपचार शुल्क भरने में सक्षम हैं। कई मरीजों के पास स्वास्थ्य बीमा है। उन्होंने पूछा कि सरकार ऐसे मरीजों पर पैसे क्यों खर्च करना चाहती है? वैसे भी बेंगलूरु के निजी अस्पतालों का सरकार पर करीब 160 करोड़ रुपए बकाया है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. सुधाकर ने गत सप्ताह अपने बयान में कहा था कि 90 फीसदी बिलों का भुगतान सरकार कर चुकी है। 10 फिसदी बिलों को लेकर अस्पष्टता है। समीक्षा के बाद भुगतान होगा।
Published on:
24 Apr 2021 10:24 am

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