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प्रधानमंत्री के मैसूरु स्टे का होटल बिल एक साल से बकाया, होटल ने दी कानूनी कार्रवाई की धमकी

पिछले साल तीन दिवसीय आयोजन की लागत 6.33 करोड़ रुपए थी। इसमें से 3 करोड़ रुपए प्राप्त हो चुके थे और 3.33 करोड़ रुपए अभी भी एनटीसीए पर बकाया हैं। स्टार होटल में ठहरने का खर्च लगभग 80 लाख रुपये है।

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बेंगलूरु. प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में पिछले साल अप्रैल में मैसूरु पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आतिथ्य बिल, जो 80 लाख रुपये है, अभी तक चुकाये नहीं जाने के कारण विवासद खड़ा हो गया है। बताया गया है कि जिस होटल में प्रधानमंत्री रुके थे, उसने अपना बकाया वसूलने के लिए कानूनी सहारा लेने की धमकी दी है। राज्य सरकार ने कहा है कि मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाया जाएगा।

वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने शनिवार को कहा कि वह इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश करेंगे। खंड्रे के कार्यालय ने एक बयान में कहा, पिछले साल तीन दिवसीय आयोजन की लागत 6.33 करोड़ रुपए थी। इसमें से 3 करोड़ रुपए प्राप्त हो चुके थे और 3.33 करोड़ रुपए अभी भी एनटीसीए पर बकाया हैं।

मंत्री ने कहा कि स्टार होटल में ठहरने का खर्च लगभग 80 लाख रुपये है। जब यह कार्यक्रम अप्रैल 2023 में आयोजित किया गया था, तब विधानसभा चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू थी। इसलिए राज्य सरकार इसमें शामिल नहीं थी। न ही राज्य प्रतीक का उपयोग किया गया था। यह एक पूर्ण राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) का कार्यक्रम था।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की राज्य यात्रा के मद्देनजर आतिथ्य का प्रबंधन करने के लिए स्थानीय स्तर पर गठित समिति में वन विभाग के अधिकारी शामिल थे। उन्होंने बताया कि एनटीसीए ने वास्तव में कहा था कि वे कार्यक्रम की पूरी लागत वहन करेंगे।

खंड्रे ने कहा, एनटीसीए ने इस राशि (होटल की लागत) का भुगतान नहीं किया है, जबकि हमारे विभाग के अधिकारियों ने कई पत्र लिखे हैं और फोन पर इस बारे में बात की है। अब मामला मेरे ध्यान में आया है। मैं इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश करूंगा।

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