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Jaya lalitha case:अपील पर भाजपा-कांग्रेस में छिड़ी सियासी जंग

भाजपा नेता जयललिता के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रहे हैं और कर्नाटक को बेवजह 'बलि का बकरा बनाया जा रहा है

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Manjoor Ahamad

May 23, 2015

Bagalore:BJP-Congress clash on jaya case

file photo

बेंगलूरु.
पांचवी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद का शपथ लेने वाली जे.जयललिता को कर्नाटक हाईकोर्ट से बरी किए जाने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीति शुरू हो गई है। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता और समाज परिवर्तन समुदाय के अध्यक्ष एस.आर हिरेमठ ने अपील दायर करने के प्रति राज्य सरकार की कथित 'अनिच्छा की आलोचना की और मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या से अपील दायर करने की मांग की।

खामोश क्यों है भाजपा: रमेश

यहां शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि अदालत में याचिका दायर करने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पहले अपना रुख स्पष्ट करे। हर कोई कर्नाटक के कंधे पर बंदूक रखकर अपना निशाना साधना चाहता है।
इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना रुख क्यों नहीं स्पष्ट करते। उन्होंने कहा कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं। दोनों नेता सभी राजनीतिक पार्टियों के अंदरुनी मामलों पर बोलते रहे हैं मगर एआईएडीएमके के बारे में एक शब्द नहीं बोलते।
सबसे पहले उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता जयललिता के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो रहे हैं और कर्नाटक को बेवजह 'बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इस मामले से कर्नाटक का कोई लेना-देना नहीं है। जयललिता के आय से अधिक संपत्ति से जुड़े इस मामले में मूल याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी हैं जो भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। उन्होंने कहा कि अपील दायर करने के लिए अभी 79 दिन बाकी हैं और सिद्धरामय्या सरकार इसपर उचित निर्णय करेगी।

विधि विभाग की रिपोर्ट का इंतजार: सीएम

उधर, मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कहा कि इस मामले पर राज्य सरकार ही निर्णय करेगी और उसके लिए आलाकमान से अनुमति लेने जैसी कोई बात नहीं है। बेंगलूरु भ्रमण पर निकलने से पहले पत्रकारों से बातचीत में सिद्धू ने कहा कि इस मसले पर कोई निणर्य लेने से पहले वे विधि विभाग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। विभाग फैसले के कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है।

चुनौती नहीं देना ऐतिहासिक भूल होगी: हिरेमठ

हालांकि, सामाज परिवर्तन समुदाय के अध्यक्ष एस.आर हिरेमठ ने कहा कि 19 साल पुराने इस मामले में कर्नाटक सरकार ही एक मात्र अभियोजक है। मगर वह सर्वोच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने में अनावश्क देरी कर रही है। सरकार की यह अनिच्छा ऊंचे स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के समान है। राज्य सरकार को शीर्ष अदालत में चुनौती नहीं देकर एक ऐतिहासिक भूल से बचना चाहिए। (कासं)