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भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के पक्षधर थे राजेन्द्र बाबू

स्वतंत्र भारत में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय सांस्कृति चेतना के पुनरुत्थान के लिए जाने गए।

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भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के पक्षधर थे राजेन्द्र बाबू

भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के पक्षधर थे राजेन्द्र बाबू

बेंगलूरु. स्वतंत्र भारत में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारतीय सांस्कृति चेतना के पुनरुत्थान के लिए जाने गए। राष्ट्रपति जैसे पद पर रहते हुए भी वे भारत की संस्कृति के संरक्षण और पूरी दुनिया को इससे अवगत कराने के पक्षधर थे। इसी का परिणाम था उनके राष्ट्रपति रहते जब भी विदेशी मेहमान राष्ट्रपति भवन में आते थे तब उनकी आरती उतारी जाती थी। कुछ राजनीतिज्ञों के विरोध के बावजूद उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनरुत्थान का समर्थन दिया। उनका मानना था कि विध्वंस से ज्यादा शक्ति पुनर्निर्माण में है और सोमनाथ भारत की अस्मिता का प्रतीक है।


यह विचार सोमवार को बिहार भवन में डॉ राजेन्द्र बाबू मेमोरियल ट्रस्ट एवं सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राजेन्द्र बाबू जयंती में वक्ताओं ने व्यक्त किए। ट्रस्ट के चेयरमैन राजेश्वर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जयंती में वक्ताओं ने राजेन्द्र बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को मौजूदा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्पद बताया। राजेन्द्र प्रसाद की तस्वीर पर पुष्पांजलि से आरंभ कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन, संविधान निर्माण और राष्ट्रपति के रूप में राजेन्द्र प्रसाद की सेवाओं का स्मरण किया।


कार्यक्रम में परिषद की वार्षिक स्मारिका दैनंदिनी-२०१९ का विमोचन किया। स्मारिका समिति के चेयरमैन परमानंद शर्मा ने बताया कि दैनंदिनी में तिथियों के साथ ही बिहार एवं कर्नाटक के प्रमुख त्योहारों और जयंतियों का विवरण है।
स्मारिका के संपादक नित्यानंद शर्मा एवं उपसंपादक राजगुरू ने स्मारिका को बिहार भवन का मुखपत्र बताया। इसके पूर्व परिषद के अध्यक्ष उदय कुमार एवं ट्रस्टी रामलखन सिंह ने स्वागत किया। इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य रामजी तिवारी का सम्मान किया गया। श्रीकांत शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में परिषद के मंत्री अरुण झा सहित आनंद मोहन झा, पी.पी. झा आदि उपस्थित थे। संचालन विनय यादव ने किया।

आत्मरक्षा के लिए नवकार मंत्र जरूरी
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में सोमवार को हुकमचंद, नवरत्नमल लुंकड़ के निवास पर पैंसठिया छंद, शांति जाप, जय जाप आदि मंत्रों से युक्त अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। जयधुरंघर मुनि ने कहा कि जाप से ताप और संताप मिट जाते हैं और जिस प्रकार रक्षा के लिए योद्धा को कवच की जरूरत होती है, उसी प्रकार आत्मा की रक्षा के लिए नवकार मंत्र जैसे स्तुतियों की आवश्यकता होती है।

जयपुरंदर मुनि ने सेवा का महत्व बताया। शुरुआत में समणी श्रुतनिधि ने निर्लिप्त जीवन जीने की प्रेरणा दी। कविता लुंकड़, अमिता नाहर, पवन नाहर ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया एवं चेतन कोठारी ने गुरु भक्ति पर गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर चेन्नई से जयमल जैन श्रावकसंघ का एक शिष्टमंडल उपस्थित था। राष्ट्रीय अध्यक्ष पारसमल गादिया ने वर्ष २०१९ का चातुर्मास करने की विनति की। मंगलवार सुबह विजयनगर स्थित स्थानक से विहार कर मागड़ी रोड जैन स्थानक पहुंचेंगे।