गणेशबाग स्थानक में प्रवचन
बेंगलूरु. गणेशबाग स्थानक भवन में साध्वी विजयलता ने प्रवचन में कहा कि जिज्ञासु ने परमात्मा से पूछा कि धर्म कब करना चाहिए तो प्रभु ने कहा कि जब तक शरीर में बुढ़ापा या रोग नहीं आये तब तक धर्म कर लेना चाहिए । जब शरीर प्रमादी हो जाता है, उत्साह नहीं रहता है, शक्तिविहीन हो जाता है तब हम धर्म कार्य नहीं कर सकते हैं । जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिये प्राण वायु जरूरी है उसी प्रकार आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए धर्म भी जरूरी है । मनुष्य भव को सार्थक करने के लिये, भव भ्रमण को मिटाने के लिए धर्म आराधना करनी चाहिए।
साध्वी प्रज्ञाश्री ने कहा कि सनातन संस्कृति हो या जैन धर्म, सभी में सत्संग का बहुत बड़ा महत्व बताया है। वर्तमान जीवन यात्रा में धर्म के साथ शुभकार्य कार्य करने से अगले भव की गति यात्रा अच्छी होती हैं । इसलिए प्रतिदिन प्रवचन में जिनवाणी श्रवण करने सत्संग में जरूर आना चाहिए। संचालन मंत्री सुरेंद्र आंचलिया ने किया ।