14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वनों में दुर्लभ हो गए हैं कदंब वृक्ष : हेगड़े

केंद्रीय कौशल विकास उद्यमशीलता मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा कि वनों में कदंब वृक्ष दुर्लभ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कदंब वृक्ष का इतिहास अत्यंत प्राचीन है।

2 min read
Google source verification
वनों में दुर्लभ हो गए हैं कदंब वृक्ष : हेगड़े

वनों में दुर्लभ हो गए हैं कदंब वृक्ष : हेगड़े

सिरसी -कारवार. केंद्रीय कौशल विकास उद्यमशीलता मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने कहा कि वनों में कदंब वृक्ष दुर्लभ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि कदंब वृक्ष का इतिहास अत्यंत प्राचीन है।


वनवासियों के लिए ४-५ पंचायतों में कदंब वृक्षों को लगाने का कार्य अभियान के रूप में विकसित हो। वे रविवार को कदंब पौधरोपण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।


सिरसी तालुक के वनवासी में वनवासी-दासनकोप्प मार्ग पर स्थित सालुमरद तिम्मक्का उद्यान के सामने वन विभाग तथा कदंबा फाउंडेशन के सहयोग से ग्राम पंचायत की ओर से आयोजित कदंब पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।


हेगडे ने कहा कि कदंब वृक्ष से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी है। विज्ञान के अनुसार कदंब वृक्ष के जड़, तन व छाल औषधिगुणों से युक्त हैं। इस वृक्ष के कारण ही इस राज्य को कदंब राज्य के नाम से भी जाना जाता है।
प्रथम कन्नड़ राजवंश के राजा मयूरवर्मा कदंब वृक्ष के नीचे बैठकर ही प्रशासन चलाते थे। कदंब वन को विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अनंत कुमार हेगड़े ने कहा कि यदि कदंब वन का विकास होगा तो पर्यटन का विकास होगा। मेडिकल पर्यटन काफी विकसित हो चुका है। प्राचीन चिकित्सा प्रणाली के प्रति आज पुन: लोगों की रुचि बढ़ रही है।


उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के ४-५ पंचायतों में १०-२० लाख कदंब वृक्ष लगाने की आवश्यकता है। लोक प्रतिनिधियों को कदंब वृक्ष के महत्व को उजागर करने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।


इस अवसर पर डी.एफ.ओ. सुदर्शन, आर.एफ.ओ. रघु, बनवासी ग्राम पंचायत के अध्यक्ष गणेश सण्णलिंगण्णवर, तालुका पंचायत उपाध्यक्ष, चंद्रू देवाडिग, ए.पी.एम.सी. के सदस्य शिवकुमार देसाई, यूथ फॉर सेवा के उमापति सहित अनेक गणमान्य व पदाधिकारी उपस्थित थे।

मनुष्य भव मिलना प्रभु की कृपा है
हिरियूर. जैन आचार्य महेंद्रसागर सूरी ने कहा कि इस संसार में मनुष्य भव मिलना प्रभु की कृपा है। कोई बड़ा हो या न हो, किंतु स्वयं से उसकी परछाई बड़ी नहीं होनी चाहिए। यदि मनुष्य पद, प्रतिष्ठा व सत्ता से महान कहलाता हो, रूप से आदर पाता हो, बल से ही बड़ा बनता हो और वैभव से ही पूजा जाता हो तब तो वह मनुष्य छोटा हो गया, सत्ता, पद, प्रतिष्ठा, बल और वैभव बड़े बन गए।

मनुष्य से उसकी परछाई बड़ी हो गई। उन्होंने कहा कि अंधेरे में मनुष्य का साथ जब परछाई छोड़ देगी तब मनुष्य की दशा क्या होगी उससे वह बेखबर है। राग-द्वेष, कषाय विषयादि शत्रुओं को संसार के मैदान में पराजित करने वाले अरिहंत प्रभु की कृपा से ही मनुष्य सर्व कर्मक्षय शुध्द आत्मदशा का स्वामी बन सकता है।