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शिखर पर पहुंचने के लिए आत्म चिंतन जरूरी-साध्वी भव्यगुणाश्री

धर्मसभा का आयोजन

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शिखर पर पहुंचने के लिए आत्म चिंतन जरूरी-साध्वी भव्यगुणाश्री

शिखर पर पहुंचने के लिए आत्म चिंतन जरूरी-साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु. चिंतामणि पाश्र्वनाथ जैन श्वेताम्बर चेरिटेबल ट्रस्ट महालक्ष्मी लेआउट जैन संघ में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि जीवन में तीन बातें बड़ी महत्वपूर्ण हैं। इनमें प्रतीक्षा, परीक्षा व समीक्षा। पहली बात है जीव भजन करे, साधन करे, सत्कर्म करे, पुरुषार्थ करे, कभी ना कभी फल जरूर मिलेगा। प्रभु कृपा जरूर करेंगे मगर उसको प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। दूसरी बात है परीक्षा, संसार की परीक्षा करते रहना। जितना जल्दी जान लोगे इससे मुक्त हो जाओगे। जानना ही मुक्त होने का मार्ग है। जगत में सर्वत्र बहुत विषाद है। प्रभु की और संत की शरणागति ही विषाद से प्रसाद की ओर ले जाती है। तीसरी बात है समीक्षा अपनी निरंतर समीक्षा करते रहो। स्वयं का सुधार ही तुम्हारा उद्धार कर सकता है। भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिक समृद्धि तुम्हें स्वयं के द्वारा ही प्राप्त होगा। एक ज्ञानी और महान व्यक्ति आत्मचिंतन करते-करते शिखर पर पहुंच जाता है। वहीं अज्ञानी स्वयं की बजाय दूसरों के गुण-दोष का चिंतन ही करते रहने के कारण उपलब्धियों से वंचित रह जाता है। साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि श्रद्धा और भक्ति की डोर में बंधकर जब भक्त परमात्मा की स्तुति, उनका चिंतन और फिर उनके अमर संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने लगता है, तभी धर्म वृद्धि होने लगती है। संसार में यही आत्म-उत्थान का माध्यम है। चातुर्मास का समय धर्म-ध्यान के लिए बहुत ही श्रेष्ठकर व हितकर है, क्योंकि इस दौरान साधु-साध्वियों का पावन सान्निध्य मिलते, उनके अमृत वचन सुनने, अरिहंतों का ज्ञान जानने से अज्ञान का अंधकार दूर होने लगता है। नरेश बंबोरी ने बताया कि शनिवार के अभिषेक वसंताबाई लूणिया, मंजुबाई लूणिया, अशोककुमार लूणिया की ओर से किया गया। रविवार सुबह उवसग्गहरं अभिषेक नूतन देवी विक्रम कुमार बंदामूथा परिवार की ओर से होगा।