
जगत के कर्म पुरुष थे श्रीकृष्ण-सुधाकंवर
बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में विराजित साध्वी सुधाकंवर ने सोमवार को वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ हनुमंतनगर के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में कहा कि संसार में तीन प्रकार के पुरुष होते हैं। प्रथम धर्म पुरुष-जिन्हें तीर्थकर परमात्मा कहा जाता है। दूसरे भोग पुरुष-चक्रवर्ती को कहा गया है एवं तीसरे कर्म पुरुष-जिन्हें वासुदेव को कर्म पुरुष कहा गया है। श्रीकृष्ण भगवान वासुदेव को जगत में कर्म पुरुष के नाम से जाना जाता है। उन्होंने श्रीकृष्ण भगवान के महान प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीकृष्ण के प्रेरणादायी जीवन से सभी को प्रेरणा ग्रहण करने की बात कही। संसार में जो धर्म की रक्षा करते हैं। जो अन्याय-अनीति का प्रतिकार करते हुए समस्त मानव जाति के कल्याण की कामना करते हुए संसार में मानवता की सेवा में अपना सर्वस्व जीवन बलिदान कर दिया। वे महान कर्म योगी न्याय-नीति निपुण प्रजावत्सल, गौप्रेमी अनुशासनता, कर्तव्यपालन प्रेम मित्रता सेवा, गुणग्राहकता जैसे अनेक विशिष्ट गुणों की सौरभ से भरा कृष्ण का जीवन अनेक विशेषताओं का संगम था। गीता में दिए उनके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक है। मित्रता कैसी हो यह उनके व सुदामा के जीवन चरित्र को जानकर अच्छी तरह समझा जा सकता है। साध्वी सुयशा ने कहा कि व्यक्ति को भूतकाल में घटी बुरी स्मृतियों को अपने मानस पटल से निकालकर दु:खी, अधीर चिन्ताग्रस्त न होकर वर्तमान को सुखी संमृद्ध खुशहाल बनाएं। संघ अध्यक्ष कल्याण सिंह बुरड़ ने स्वागत किया। सभा में हनुमंतनगर संघ रक्षक नेमीचंद खिंवसरा, जैन कॉन्फें्रस के पुखराज मेहता, गौतमचंद धारीवाल, रतनचंद सिंघी, नेमीचंद दक, महावीर चंद मारु उपस्थित थे। संचालन संघ के सहमंत्री रोशन कुमार बाफना ने किया।
Published on:
31 Aug 2021 08:57 am

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