
आत्मा नित्य और शरीर अनित्य
बेंगलूरु. उदयनगर जैन स्थानक में विराजित कान्तिमुनि एवं साध्वी प्रतिभाश्री ने कहा कि दुनिया में नित्य और अनित्य दोनों है, हमारी आत्मा नित्य है नित्य इस रूप में है कि आत्मा वर्तमान में है अनंत काल पहले भी थी और अनंत काल तक बनी रहेगी। शरीर अनित्य हैं, क्योंकि यह एक दिन नष्ट हो जाएगा हमारी आत्मा नित्य और शरीर अनित्य है, इन दोनों का योग ही हमारा जीवन है। दुनिया में अनेक लोग हैं जो संसार की अनित्यता को समझ कर संसार से विरक्त हो जाते हैं, दीक्षित हो जाते हैं, यद्यपि दीक्षित होने के बाद भी कई बार मन चंचल हो जाता है, उस विचलन को दूर करने का प्रयास करना चाहिए रथनेमी पुरुषोत्तम व्यक्ति थे, परंतु साध्वी राजमति से प्रणय निवेदन करने लगे। उस समय राजमति ने बड़ी दृढ़ता के साथ रथनेमी के राग भाव को शांत किया। एक साध्वी का ऐसा प्रेरणा स्वर सुना की मन में आया हुआ विचलन का भाव दूर हो गया।
साध्वी दीक्षिताश्री ने कहा कि विरोध में किया हुआ कार्य कभी सफलता नहीं दिलाता है। खुशी और क्षमा के सागर में लहराता हुआ व्यक्ति अपनी मंजिल को प्राप्त कर लेता है। धर्मसभा का संचालन संघ के अध्यक्ष राजेंद्र कोटडिय़ा ने किया।
Published on:
14 Dec 2019 05:41 pm
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