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आध्यात्मिक शक्ति-पुंज थे आचार्य महाप्रज्ञ

अभिव्यक्ति: आज भी मिलती है उनके जीवन से प्रेरणा

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बेंगलूरु. तेरापंथ सभा के तत्वावधान में साध्वी कंचनप्रभा, साध्वी मंजूरेखा आदि ठाणा ५ के सान्निध्य में तेरापंथ भवन गांधीनगर में आचार्य महाप्रज्ञ का महाप्रयाण दिवस आयोजित किया गया। साध्वी के महामंत्रोच्चार व महिला मंडल के महाप्रज्ञ अष्टकम के संगान से शुरू कार्यक्रम में साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि विशद आध्यात्मिक शक्ति पुंज के रूप में आचार्य महाप्रज्ञ का संपूर्ण जीवन उत्प्रेरक रहा। साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि दार्शनिक जगत के महासूर्य आचार्य महाप्रज्ञ महावीर दर्शन के प्रखर प्रवक्ता थे। साध्वी उदितप्रभा, साध्वी निर्भयप्रभा, साध्वी चेलनाश्री ने भी श्रद्धाभाव समर्पित किए। सभा अध्यक्ष कन्हैयालाल गिडिया, महासभा कर्नाटक प्रभारी प्रकाशचंद लोढ़ा, महिला मंडल अध्यक्ष अनीता गांधी आदि पदाधिकारी व बड़ी संख्या में गणमान्य उपस्थित रहे। संचालन मंत्री रमेश कोठारी ने किया।

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हर कसौटी पर खरे उतरे
बेंगलूरु. जयनगर स्थित जवाहर नगर में गुरुवार को आचार्य महाप्रज्ञ के महाप्रयाण दिवस पर विशेष कार्यक्रम हुआ। साध्वी मधुस्मिता ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ अपने लेखन और कर्म की कसौटियों पर खरे उतर कर अमर हुए। अशोक कातरेला ने मंगलाचरण किया। महिला मंडल की बहनों, ज्ञानशाला के बच्चों व खेताराम ने गीतों के माध्यम से श्रद्धा अभिव्यक्ति की। विजयनगर तेरापंथ सभा अध्यक्ष धनराज टांटिया व साध्वी कलविभा ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन साध्वी सहजयशा ने किया।

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मन का समर्पण सबसे कठिन
बेंगलूरु. मुनि सुव्रत स्वामी जैन संघ कुमारापार्क में आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि परमात्मा की पूजा भक्ति में द्रव्य चाहे कितने ही ऊंचे क्यों न हों, स्तवना भी सुमधुर हो, परंतु मन का संबंध न हो तो किया हुआ प्रयास भी निष्फल है। उन्होंने कहा कि परमात्मा को धन, वचन और काया का समर्पण आसान है, परंतु मन का समर्पण सबसे कठिन है। शुक्रवार को सुबह8.30 बजे जैनाचार्य का शांतिनगर में प्रवेश होगा।

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शत्रुओं पर विजय पाने में सहायक जिनवाणी
बेंगलूरु. चिकपेट सिटी जैन स्थानक में विराजित जयधुरन्धर मुनि ने कहा कि जिनवाणी सर्व शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होती है। उन्होंने कहा कि आत्मा का सबसे बड़ा शत्रु कर्म है और उसे पराजित करने के लिए सर्वप्रथम मन को जीतना होगा।