याचिकाकर्ताओं ने सुब्बम्मा और उनकी बेटी आशा द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर 10 सितंबर को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने की वैधता पर सवाल उठाया था।
बेंगलूरु. उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को योजना और सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर और अन्य के खिलाफ अनुसूचित जाति की एक महिला और उसकी बेटी के साथ दुर्व्यवहार और उनकी जमीन पर अतिक्रमण करने के आरोप में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) पर रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने रीयल एस्टेट कंपनी सेवन हिल्स डेवलपमेंट्स एंड ट्रेडर्स के निदेशक सुधाकर और उनके सहयोगियों श्रीनिवासन जी. और भाग्यम्मा द्वारा दायर याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित किया।
एफआईआर की वैधता पर सवाल
याचिकाकर्ताओं ने सुब्बम्मा और उनकी बेटी आशा द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर 10 सितंबर को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने की वैधता पर सवाल उठाया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ताओं ने 35-40 व्यक्तियों के साथ मिलकर उनकी जमीन पर अतिक्रमण किया। तब 9 सितंबर को शिकायतकर्ता बाहर थे। जब शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचे और कार्रवाई पर सवाल उठाया, तो याचिकाकर्ताओं ने कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया और जातिगत संबोधन के साथ अपमानित किया। उस जमीन पर याचिकाकर्ताओं के पक्ष में पंजीकरण की वैधता को लेकर अदालत में विवाद लंबित है।