
चंद्रयान-2 के लैंडर 'विक्रम' के न्यून संस्करण का सफल लैंडिग परीक्षण
बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के महत्वाकांक्षी दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर 'विक्रम' के न्यून संस्करण का सॉफ्ट एवं सफल लैंडिग परीक्षण किया है। यह परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रणोदन परिसर में विशेष रूप से तैयार किए गए केंद्र में किया गया।
दरअसल, इसरो ने अपने संस्थापक विक्रम साराभाई के नाम पर लैंडर का नाम विक्रम रखा है। दूसरे चंद्र मिशन में लैंडर की अहम भूमिका होगी क्योंकि यह रोवर को लेकर चांद की धरती पर उतरेगा और कई अहम प्रयोगों को अंजाम देगा।
इस लैंडर की चांद की धरती पर सॉफ्ट और सुरक्षित लैंडिंग एक बड़ी चुनौती है और इस दृष्टिकोण से इसरो द्वारा किया गया परीक्षण काफी अहम है।
इसरो ने कहा है कि यह चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को क्रियान्वित करने के लिए लैंडर एक्चुएटर परफॉर्मेंस परीक्षण (एलएपीटी) था जो पूर्ण रूप से सफल रहा।
परीक्षण के दौरान लैंडर की नेविगेशन, निर्देशन, नियंत्रण प्रणाली आदि को परखा गया जो पूरी तरह सफल रहा। इस परीक्षण के लिए चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति को ध्यान में रखकर लैंडर विक्रम का एक ऐसा न्यून संस्करण तैयार किया गया जो धरती के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव की भरपाई कर सके।
साथ ही लैंडर के इंजन का थ्रस्ट स्तर भी परखा गया। चूंकि, इंजन को निर्वात (वैक्युम) में परिचालित करना है इसलिए उसका थ्रस्ट लेवल समुद्र के स्तर पर परखा गया। लैंडर को एक क्रेन में बांधकर 100 मीटर की ऊंचाई पर ले जाया गया और वहां से उसकी स्वचालित लैंडिंग
कराई गई।
इस दौरान लैंडर के सेंसर, एक्चुएटर्स, नेविगेशन, गाइडेंस एवं कंट्रोल आदि का प्रदर्शन आशा के अनुरूप रहा तथा 100 मीटर की ऊंचाई के नीचे लैंडिंग के लिए गाइडेंस एल्गोरिदम आदि प्राप्त किए गए।
इस दौरान लैंडर के सीधे उतरने और उतरने से पहले मंडराने आदि का प्रदर्शन भी किया गया। तीसरे और आखिरी परीक्षण में लैंडर को परवलयाकार पथ पर अग्रसारित करते हुए लैंड कराया गया और तमाम आंकड़े प्राप्त किए गए।
इसरो ने कहा है कि यह लैंडर का तीसरा और आखिरी परीक्षण था। इस परीक्षण में सफलता के साथ ही चंद्रयान-2 मिशन की तैयारियों के दृष्टिकोण से मील का एक पत्थर पार हो गया।
दरअसल, इसरो जनवरी 2019 में दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण का लक्ष्य लेकर चल रहा है। हालांकि, अभी मिशन से जुड़ी कई चुनौतियां है जिससे पार पाना है। इस मिशन में एक आर्बिटर और एक रोवर भेजा जाएगा।
Published on:
27 Oct 2018 06:25 pm
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