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सुप्रीम कोर्ट ने दिया कर्नाटक के जिला न्यायालयों के बार निकायों में महिला वकीलों के आरक्षण का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के जिला न्यायालयों के बार निकायों की परिषद की कार्यकारी समिति में 30 प्रतिशत सीटों के साथ-साथ कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया।

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Supreme Court of India

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बेंगलूरु. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक के जिला न्यायालयों के बार निकायों की परिषद की कार्यकारी समिति में 30 प्रतिशत सीटों के साथ-साथ कोषाध्यक्ष का पद भी महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि बेंगलूरु के अधिवक्‍ता संघ के मामले में पारित उसका निर्देश राज्‍य के सभी जिला न्यायालयों पर भी लागू होगा।

बेंगलूरु की महिला वकीलों द्वारा 24 जनवरी को बेंगलूरु अधिवक्‍ता संघ के मामले में पारित इसी तरह के निर्देश की मांग के बाद शीर्ष अदालत का यह आदेश आया, जिसमें अदालत ने महिला वकीलों के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की थीं।

महिला वकीलों की ओर से पेश वकील ने कहा कि हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के लिए चुनाव हुए और कोषाध्यक्ष का पद एक महिला उम्मीदवार ने जीता। 24 जनवरी को अपनी पूर्ण शक्तियों का प्रयोग करते हुए शीर्ष अदालत ने बेंगलूरु अधिवक्‍ता संघ (एएबी) में कोषाध्यक्ष का पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित कर दिया।

न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि अधिवक्ताओं के विभिन्न निर्वाचित निकायों में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करने का यह "उचित समय" है और संघ की महिला उम्मीदवारों के लिए सीटें निर्धारित करने के लिए ज्ञापन और उप-नियमों में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

पीठ ने चुनाव की देखरेख के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति और बार निकाय चुनावों के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी को नामांकन आमंत्रित करने की तिथि बढ़ाने और यदि आवश्यक हो, तो चुनाव को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया। हालांकि, ऐसा निर्णय समिति और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के विवेक पर होगा।