
बेंगलूरु. वेलेंटाइंस डे की आहट के साथ ही गुलाब की खेती करने वालों के जीवन में आमदनी की प्यार भरी खुशबू बिखरी है। ऐसा हर साल होता है। वेलेंटाइंस डे से कुछ दिन पूर्व ही गुलाब की पैदावार करने वालों किसानों और इन फूलों का कारोबार करने वालों के पास आर्डर की भरमार होती है।
्रबेंगलूरु से देश के अन्य शहरों के अलावा यूरोप, खाड़ी देश, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए गुलाबों का निर्यात होता है। खासकर ताज महल, ग्रांड गाला तथा फस्र्ट रेड प्रजाति के गुलाबों की मांग विदेशों में अधिक है। यूरोपीय बाजार के लिए वेलेंटाइंस डे के मद्देनजर गुलाबों की आखिरी खेप गुरुवार को निकल चुकी है जबकि खाड़ी देशों के लिए आखिरी खेप 11 फरवरी को रवाना हो गई। अधिक मांग वाले गुलाबों की पैदावार बेंगलूरु के आसपास 45 किलोमीटर के दायरे में करीब 125 व्यक्ति अथवा संस्थान करते हैं।
दिन करीब आने के साथ दाम बढ़ेंगे
दक्षिण क्षेत्र पुष्प कृषि संगठन (एसआईएफए) के अध्यक्ष के. रामकृष्ण ने बताया कि वेलेंटाइंस डे मनाए जाने की घडिय़ां ज्यों ही कम होती जाएंगी, गुलाब के फूलों की मांग और कीमतों में उसी तरह वृद्धि होती जाएगी। पिछले वर्ष विमौद्रीकरण के चलते कारोबार में कमी आई थी, लेकिन इस साल स्थिति उत्साहजनक है। गुलाब की प्रति स्टेम (शाखा समेत एक फूल) की कीमत अपने उच्चतम स्तर 15 रुपए को पहले ही पार कर चुकी है। इसमें 14 फरवरी या इससे एक पहले के दिनों में और उछाल आने की पूरी संभावना है।
अभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंगलूरु के गुलाब की प्रति स्टेम कीमत 0.3 यूरो (भारतीय मुद्रा में करीब 23 रुपए) चल रही है, जो वेलेंटाइंस डे के करीब आने तक 0.5 यूरो (भारतीय मुद्रा में करीब 39 रुपए) तक पहुंच जाने की उम्मीद है।
गुलाब उत्पादकों का स्वर्ण काल
देश में गुलाबों के सबसे बड़े निर्यातक शहर के रूप में स्थापित हो चुके बेंगलूरु के स्थानीय बाजार में भी वेलेंटाइंस डे के लिए इस फूल की मांग अधिक हुई है। अमूमन फरवरी का महीना गुलाब उत्पादकों के लिए स्वर्णकाल माना जाता है। मगर इस बार चीन का नव वर्ष 16 फरवरी को है, इस मौके पर भी गुलाबों की अच्छी खासी मांग होती है। इसके बाद 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, ये कुछ ऐसे मौके हैं जब बेंगलूरु के गुलाबों की मांग अधिक होती है।
ग्रांड गाला, फस्र्ट रेड फीके
कलियों के अच्छे आकार, लंबे स्टेम और लाने, ले जाने में आसान होने के कारण गुलाब की ताज महल प्रजाति अन्य दो पुराने प्रजातियों ग्रांड गाला तथा फस्र्ट रेड पर भारी पड़ता है। इसलिए फूल उत्पादक भी ताज महल की खेती करना अधिक पसंद करने लगे हैं। कुल उत्पादन का करीब एक प्रतिशत ही ग्रांड गाला तथा फस्र्ट रेड का हिस्सा है, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादन ताज महल का ही है। नई प्रजातियों में रोहडेस का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। एफआईएसए के सचिव जयप्रकाश राव के अनुसार पिछले कुछ सालों से ताज महल की मांग लगाताार बढ़ती जा रही है।
Published on:
13 Feb 2018 01:23 am
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