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मन की प्राप्ति बिना नहीं होता जीवात्मा का विकास

जीवात्मा अधिकतम पाप और पुण्य का बंध मन से ही करती है

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मन की प्राप्ति बिना नहीं होता जीवात्मा का विकास

मैसूरु. सुमतिनाथ जैन संघ के महावीर भवन में आचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि अनंत जीव राशि में मन की प्राप्ति सभी जीवों को नहीं होती। शास्त्र में बताए दस प्राणों में मन बल मात्र पंचेन्द्रिय को ही मिलता है। मन की प्राप्ति के बिना जीवात्मा का विशेष रूप से विकास भी नहीं होता है। पतन भी नहीं होता है। जीवात्मा अधिकतम पाप और पुण्य का बंध मन से ही करती है।

आचार्य ने कहा कि क्रिया में परिवर्तन नहीं होने पर भी मन के भावों में परिवर्तन आने से जीवात्मा पुण्य अथवा पापों से बंधती है। जीवात्मा को मन मिलना खूब कठिन है, परंतु मन की प्राप्ति के बाद भी मन को शुभ विचारों से बांधे रखना और भी ज्यादा कठिन है।


पहले अपनी क्षमता पहचानें फिर लक्ष्य तय करें
मैसूरु. मैसूरु महिला मंडल की ओर से शुक्रवार को साध्वी लब्धिश्री ठाणा 3 के सान्निध्य में करें लक्ष्य निर्धारण कार्यशाला का आयोजन किया गया। साध्वी ने महामंत्र का उच्चारण किया। इन्द्रा कोठारी, निर्मला मेहर, कंचन बुरड़ व सुधा नौलखा ने मंगलाचरण किया। स्वागत वनमाला नाहर ने किया। कार्यशाला के वक्ता सुनील देरासरिया ने लक्ष्य निर्धारित करने और प्राप्त करने के बारे में जानकारी दी। उन्होंने महिला सशक्तीकरण पर भी विचार व्यक्त किए। साध्वी लब्धिश्री ने कहा कि पहले अपनी क्षमता को पहचानें। अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उसे पाने के लिए जी जान से कोशिश करें। संचालन खामोश मेहर ने किया।


खुले दिल-दिमाग से दें दान
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि दान और उदारता का गहरा संबंध है। बादल के पास जितना भी जल है वह सारे जल को बरसा देता है। अपने पास कुछ भी नहीं रखता है। वृक्ष पर जितने फल आते हैं, वृक्ष सारे के सारे फलों को बांट देता है। एक भी फल अपने पास, अपनी जड़ों में छिपाकर नहीं रखता है। ये सब उदारतर के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इनका जीवन परोपकार के लिए है। मानव खुले दिल दिमाग से कुदरत की हर वस्तु को गंहण करता हे। इसलिए उसे भी चाहिए कि खुले दिल दिमाग से दान दे।