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जो रिश्तों को संभाले वह सुदर्शना

भाई जब रूठ जाता है तो उसे मनाने की ताकत सिर्फ बहन के पास होती है।

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जो रिश्तों को संभाले वह सुदर्शना

मैसूरु. सिटी स्थानक में डॉ. समकित मुनि ने भाई दूज के प्रसंग पर नंदीवर्धन और सुदर्शना की कथा सुनाते हुए कहा कि भाई-बहन का रिश्ता बहुत प्यारा होता हे।

भाई जब रूठ जाता है तो उसे मनाने की ताकत सिर्फ बहन के पास होती है। बिना बहन के बचपन लम्बा खिंच जाता है। जो संभले हुए रिश्तों को संभाले वह सुदर्शना होती हे।

जैसे की तैसे की नीति से आगे बढ़ते हैं तो रिश्तों की उम्र छोटी हो जाती है। व्यक्ति का अधिकांश प्रयास बिगड़े हुए रिश्तों को संभालने में होता है।

समय के रहते यदि संभले हुए रिश्तों को संभाल लें तो रिश्ते कभी टूटे ही नहीं। समय पर संभालना ही संभालना होता है। मुनि ने कहा कि जो भाई को संभाले वह सुदर्शना होती है और जो संभले हुए भाई को बिगाड़े वो सुर्पनखा होती है।

सूर्पनखा ने अपने भाई रावण का परिवार बर्बाद कर दिया, केवल अपने स्वार्थ के कारण। संचालन सुशील कुमार नंदावत ने किया। युवा संगठन के अध्यक्ष राजन बाघमार ने बताया कि रविवार को महापुरुषों की जयंती मनाई जाएगी।

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