
बेंगलूरु. गांधीनगर तेरापंथ भवन में ध्यान-दिवस पर साध्वी अणिमाश्री ने धर्मचर्चा करते हुए कहा कि ध्यान जीवन के रुपान्तरण का विज्ञान है। ध्यान के द्वारा जीवन में सृजन को यथार्थ रूप दिया जा सकता है। ध्यान करनेवाले के भीतर वह सृजनात्मक ऊर्जा प्रकट होती है जिससे असंभव लगने वाले अनेक कार्यों को सरलता से सम्पादित किया जा सकता है।
ध्यान व्यक्ति के भीतर विधायक चिंतन का स्त्रोत प्रवाहित करता है। अस्त-व्यस्त बनी हुई जिन्दगी को ध्यान के प्रयोगों से बहुत सहजता से व्यवस्थित किया जा सकता है। ध्यान एक ऐसी विभूति और विरल सम्पदा है जिसका वर्णन नही अनुभव ही किया जा सकता है।
साध्वी ने कहा कि ध्यान के द्वारा अतीत के चिर अर्जित संस्कारों का शोधन किया जा सकता है। साध्वी कर्णिकाश्री, साध्वी सुधाप्रभा, साध्वी समत्वयशा व साध्वी मैत्रीप्रभा ने तीर्थकर भगवान शांतिनाथ स्तुतिक परिषद के साथ संगान किया।
साध्वी मैत्रीप्रभा ने जप अनुष्ठान के द्वारा परिषद को जोड़ा।
साध्वी समत्वयशा ने मध्याह्न में आगम का पारायण कराया।
रात्रि में साध्वीवृन्द ने जप गीतिका की प्रस्तुति दी एवं साध्वी अणिमाश्री ने तेरापंथ के अमर शहीद मुनि वेणीराम के रोचक इतिवृत्त को सरस व प्रभावक शैली में प्रस्तुत किया जिसे सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए।
Published on:
22 Aug 2020 09:18 pm

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