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प्रेम से दुनिया को जीता जा सकता है

प्रवचन: वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्त्वावधान में धर्मसभा

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बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्त्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि जब व्यक्ति अपने स्वभाव में रहता है तो वह अपने आनंद में रहता है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का जीवन इतना कष्टमय था, फिर भी वे आनंद में रहते थे क्योंकि वे अपने स्वभाव में रहते थे। विश्वास और श्रद्धा, दोनों अलग-अलग जगह पैदा होती है। विश्वास चंचल मन में होता है तथा श्रद्धा आत्मा में होती है, मन मुद्गल है, आत्मा शास्वत है। जहां कसाय का उदय होता है वहां परिषह होता है जहां कसाय का जन्म हुआ, वहां चीजें पचती नहीं हंै।

मुनि ने कहा कि संयम अपनाने के बाद भी अहंकार आता है। पाप के प्रभाव से प्रतिकूल समय में व्यक्ति परिशही हो जाता है। धर्म सबसे बड़ा है जो मौत की भी मौत कर देता है। प्रेम भी जीवन में जरूरी है। इससे दुनिया को जीता जा सकता है। पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान की। रविंद्र मुनि ने ऋषभ मुनि के मासखमण के तहत 24वें उपवास तपस्या की अनुमोदना की। पूजा डागा, संतोष बोहरा ने 9वें उपवास, उत्तम चंद मुथा ने 9वें आयम्बिल तप, रजत जैन ने 9वें एकासना को आगे बढ़ाया।

महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि शनिवार को चौमुखी जाप के लाभार्थी अनिल हेमलता चोपड़ा का रविंद्र मुनि ने जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया। जाप में रूप मुनि के स्वास्थ्य लाभ की कामना की गई। सभा में मुख्य संयोजक रणजीतमल कानूंगा, आनंद कोठारी, बी शान्तिलाल पोखरना सहित विजयपुर, मुम्बई,देहरादून, अम्बाला व दिल्ली से श्रद्धालू मौजूद रहे।

स्वाध्यायी शिविर का समापन
बेंगलूरु. कर्नाटक जैन स्वाध्याय संघ के तत्त्वावधान में शूले अशोकनगर स्थित जैन स्थानक भवन में आयोजित पांच दिवसीय स्वाध्यायी शिविर शनिवार को पूर्ण हुआ। साध्वी जयश्री आदि ठाणा 5 के सान्निध्य में शिविर में 24 महिलाओं सहित 68 स्वाध्यायी सदस्यों ने भाग लिया। साध्वी ने जीवन निर्माण विषय पर विशेष बल दिया। शिविर में श्रावक के व्रत, पौषध आराधना और समाधि मरण की प्रायोगिक जानकारी करवाई गई।