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जंगलों में ट्रैकिंग पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा

कुमार पर्वत शिखर पर 4,000 लोगों ने की चढ़ाई तो चौकन्नी हुई सरकार

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बेंगलूरु. पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने मंगलवार को वन विभाग को ट्रैकिंग उन मार्गों के अलावा अन्य वन क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया, जिन्हें ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रैकिंग प्रतिबंध एक फरवरी से मानक संचालन प्रक्रिया तैयार होने तक प्रभावी रहेगा।

पिछले सप्ताह लगभग 4,000 ट्रेकर्स पुष्पागिरी वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र में देखे गए, जहां कुमार पर्वत शिखर स्थित है। वन्यजीव कार्यकर्ताओं और संरक्षणवादियों ने इसकी कड़ी आलोचना की थी।
वन मंत्री ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को लिखे पत्र में दक्षिण कन्नड़ में कुमार पर्वत शिखर पर हाल की घटना की ओर इशारा किया और लिखा कि जंगल के अंदर शिविर लगाने से इसकी पारिस्थितिकी प्रभावित होगी और क्षेत्र में जलस्रोत प्रदूषित होंगे। उन्होंने कहा कि ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों को विनियमित करने की जरूरत है। वन विभाग कर्नाटक इकोटूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रबंधित प्रत्येक ट्रैकिंग स्थान पर केवल 150 ट्रैकर्स को अनुमति देता है।


खंड्रे ने मीडिया को बताया, मैं समझता हूं कि ट्रेकर्स का जुनून और उत्साह है लेकिन इसका पारिस्थितिकी तंत्र पर किसी भी तरह से प्रभाव नहीं पडऩा चाहिए। ट्रैकरों के अनियंत्रित प्रवेश के कारण संवेदनशील क्षेत्रों में अराजकता फैल रही है। जंगल में प्लास्टिक कचरा, भोजन और बोतलें छोडऩे की घटनाएं सामने आई हैं और इससे वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है। हम उन सभी वन क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगा रहे हैं जहां वर्तमान में कोई ऑनलाइन बुकिंग प्रावधान नहीं है।

राज्य सरकार ने वैसे भी जंगल की आग और मानसून के कारण मार्च से सितंबर तक ट्रैकिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।