
जब मंत्री नहीं बन सकता तो पद का क्या मतलब : जारकीहोली
विधानसभा की सदस्यता छोडऩे पर उन्होंने कोई फैसला नहीं किया है, 11 को करेंगे अगली रणनीति का खुलासा
बेंगलूरु. मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने से नाराज वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतीश जारकीहोली ने तेलंगाना प्रभारी सचिव के पद से इस्तीफा देने की बात कही है। हालांकि, विधानसभा की सदस्यता छोडऩे पर उन्होंने कोई फैसला नहीं किया है।
वे इस बार 2850 मतों के मामूली अंतर से चुनाव जीता है। बेलगावी में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों के भीतर वे अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सचिव पद से इस्तीफा देंगे। उन्होंने कहा कि जब मंत्री ही नहीं बन सकता तो इस पद का क्या मतलब? उन्होंने कहा कि उन्होंने एमबी पाटिल सहित कई वरिष्ठ नेताओं से बात की है जिन्हें कैबिनेट में स्थान नहीं दिया गया। वे सभी नेता जो कैबिनेट गठन से खुश नहीं हैं, 11 जून को बेंगलूरु में मिलेंगे। उसी दौरान वे अगले कदम के बारे में निर्णय करेंगे। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में उनका नाम था लेकिन बदल दिया गया। उनका नाम कटवाने वाले लोगों के नामों का खुलासा वे बेंगलूरु और नई दिल्ली में करेंगे।
उधर, लगातार तीसरे दिन बेलगावी में जारकीहोली के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। रानी चेन्नम्मा सर्कल पर मानव शृंखला बनाई और कुछ समय के लिए यातायात बाधित किया। इस दौरान सिद्धरामय्या, डॉ.जी परमेश्वर, अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल के खिलाफ नारे लगाए। सतीश ने शुक्रवार को बेंगलूरु में प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव से मुलाकात की थी। मंत्रियों की सूची में नाम नहीं होने के बाद से ही सतीश के सुर लगातार बागी बने हुए हैं।
नए मंत्रियों के शपथ लेने के कुछ देर बाद बुधवार को सतीश ने बेंंगलूरु के एक होटल में असंतुष्ट विधायकों व नेताओं के साथ बैठक की थी। सतीश के भाई रमेश को मंत्री बनाया गया है, लेकिन सतीश अपने करीबी नेताओं की उपेक्षा से नाराज हैं।
Published on:
09 Jun 2018 05:29 pm

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