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आर्यिकाओं की आराधना सराहनीय : चारुकीर्ति

श्रवणबेलगोला मठ के प्रमुख चारुकीर्ति भट्टारक ने यह बात कही।
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आर्यिकाओं की आराधना सराहनीय : चारुकीर्ति

श्रवणबेलगोला. चातुर्मास धार्मिक आराधनाएं तथा महामस्तकाभिषेक महोत्सव के आयोजन में आर्यिकाओं माता का योगदान अहम रहा है। श्रवणबेलगोला मठ के प्रमुख चारुकीर्ति भट्टारक ने यह बात कही।

यहां सोमवार को चावुंडराया सभागार में समस्त आर्यिकाओं माताजियों का अभिनंदन तथा अखिल कर्नाटक जैन महिला मंच के नए अध्यक्ष के स्वागत समारोह में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि भगवान बाहुबली के महामस्तकाभिषेक महोत्सव के दौरान श्रवणबेलगोला में चातुर्मास करनेवाली आर्यिका माताओं ने जप-तप समेत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से धार्मिक संस्कारों का जो सिंचन किया है वह अनुमोदनीय है।

चातुर्मास पूरा होने के पश्चात अब शासन की प्रभावना करने के लिए यह आर्यिका माताएं विहार कर रही है इस संदर्भ उनको सम्मानित करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक जैन एसोसिएशन तथा अखिल कर्नाटक जैन महिला मंच दोनों संगठन अब एक मिसाल बन चुके है।

बेंगलूरु की निवासी पद्मनी पद्मराज अखिल कर्नाटक जैन महिला मंच संगठन की अध्यक्ष बनी है। उन पर राज्य के सभी महिला संगठनों को साथ में लेकर चलने का दायित्व है।

इस दायित्व के साथ-साथ संगठनों को सामाजिक सरोकार के कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान देना होगा। सभा में आचार्य वर्धमानसागर ने विचार रखें।समारोह में आचार्य सुविधिसागर, पंचकल्याणक सागर,सुदेश सागर, तीर्थनंदी सागर, श्रेयस सागर आदि मुनिवृंद उपस्थित थे।

इस अवसर पर आर्यिका जीनदेवी, गणनी आर्यिकाश्री सरस्वती, विशाश्री, सुविधिमती, जीनवाणी को 'महिला आदर्श साध्वी रत्न' पदवी से सम्मानित किया गया।