
अन्नपूर्णा दूग्ध योजना : दूध से पहले शिक्षकों के मन में सवालों का उबाल, कहां से आएगी चीनी और 20 मिनट में कैसे गर्म होगा 50 लीटर दूध?
बांसवाड़ा. प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में दो जुलाई से कक्षा पहली से आठवीं के तक के विद्यार्थियों को अन्नपूर्णा दुग्ध योजना के अन्तर्गत तीन-तीन दिन दूध दिया जाएगा, लेकिन समय प्रबंधन को लेकर शिक्षक वर्ग पसोपेश की स्थिति में है। इस योजना के तहत दूध तो दो जुलाई को स्कूलों में उबलेगा, लेकिन शिक्षकों के मन में कई सवाल योजना की घोषणा के साथ ही उबल रहे हैं। कुछ खामियां ऐसी हैं, जो आने वाले समय में शिक्षकों या पोषाहार प्रभारियों के लिए जी का जंजाल बनेंगी।
स्कूल ने की मॉक ड्रिल
योजना में सामग्री खरीद के तहत टोंटी वाली टंकी खरीदने का प्रावधान है। दुग्ध वितरण व्यवस्था को लेकर एक विद्यालय की ओर से मॉक ड्रिल की गई है। इसमें सामने आया कि एक बच्चे के लिए टोंटी वाली टंकी से गर्म दूध भरने में 30 सेकंड का समय लगा। ऐसे में जिन विद्यालयों में दूध पीने वाले बालकों की संख्या 300 होगी, वहां की स्थिति के बारे में अदांजा लगाया जा सकता है। लगभग 50 लीटर दूध को कैसे 20 मिनट में गर्म किया जा सकेगा। इसके बाद मध्यांतर से पूर्व पोषाहार की व्यवस्था भी करनी है। दूध पिलाने का समय सुबह प्रार्थना सभा के तुरंत बाद है। ऐसे में विद्यार्थियों की उपस्थिति के अनुसार दूध की व्यवस्था करनी होगी, लेकिन प्रतिदिन तय नहीं हो पाएगा कि कितने लीटर दूध की व्यवस्था करनी है।
अधिकारी आशंकित, साधा मौन
इस योजना के क्रियान्वयन के बाद जिले में प्रतिदिन विद्यालयों में हजारों लीटर दूध की व्यवस्था करनी होगी। प्रारंभिक शिक्षा विभाग की कार्ययोजना के अनुसार प्रतिदिन 38 हजार लीटर से अधिक दूध की व्यवस्था करनी है। जिले में यूं भी त्योहार विशेष के समय दूध की किल्लत महसूस होती है। इस योजना के शुरू होने के बाद रोजाना ही त्योहार होना है। जिले में दूध का उत्पादन कम होने, निजी डेयरी की ओर से हजारों लीटर दूध क्रय करने और अब विद्यालयों में प्रतिदिन की खपत बढऩे से उत्पन्न होने वाली समस्या को लेकर अधिकारी भी आशंकित हैं, लेकिन साफ शब्दों मेें कुछ नहीं कह पा रहे हैं।
शुभारंभ कल
बांसवाड़ा. अन्नपूर्णा दूध योजना का जिला एवं ब्लॉक स्तरीय शुभारंभ समारोह 2 जुलाई को पृथ्वी क्लब गांधी मूर्ति के पास सुबह साढ़े नौ बजे से होगा।
यह भी समस्या
दूध गर्म करने के लिए अतिरिक्त ईंधन की व्यवस्था कहां से होगी। दूध में चीनी की व्यवस्था के लिए कोई बजट तय नहीं किया है। गांव में दूध उपलब्ध नहीं होने पर शहर में दूध लाने कौन जाएगा। इसके लिए परिवहन खर्च कैसे एडजस्ट होगा।
कुक को भी दिक्कत
विद्यालयों में पोषाहार कुक कम हेल्पर बना रहे हैं। दूध गर्म करने की व्यवस्था भी संभवत: उन्हीं के जिम्मे रहेगी। इसके लिए उन्हें विद्यालय भी जल्दी आना होगा। हेल्पर लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने दस फीसदी मानदेय बढ़ाया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
Published on:
01 Jul 2018 11:08 am
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