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तारणहार हैं प्रभु श्रीराम -पं. शशिशेखर

बांसवाड़ा. शहर के कुशलबाग मैदान में चल रही रामकथा को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को बाल पंडित शशिशेखर महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम संहार करने वाले नहीं, तारणहार हैं। यज्ञ में सहायता के लिए राम-लक्ष्मण को लेने के लिए मुनि विश्वामित्र के अयोध्या पहुंचने के वृतांत का विवेचन कर उन्होंने कहा कि प्रभु प्रेम और सरलता से रिझते है। उन्हें छल छिद्र नहीं भाते, हृदय में प्रेम के सागर का प्रवाह उमड़ता है। श्रृद्धा भक्ति से परिपूर्ण समर्पित होकर भक्त जब भगवान को पुकारता है तो वह उसके सहायक बनकर उबारने को दौड़े चल

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तारणहार हैं प्रभु श्रीराम -पं. शशिशेखर

तारणहार हैं प्रभु श्रीराम -पं. शशिशेखर

तारणहार हैं प्रभु श्रीराम -पं. शशिशेखर

कुशलबाग में रामकथा का प्रवाह जारी

बांसवाड़ा. शहर के कुशलबाग मैदान में चल रही रामकथा को आगे बढ़ाते हुए सोमवार को बाल पंडित शशिशेखर महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम संहार करने वाले नहीं, तारणहार हैं। यज्ञ में सहायता के लिए राम-लक्ष्मण को लेने के लिए मुनि विश्वामित्र के अयोध्या पहुंचने के वृतांत का विवेचन कर उन्होंने कहा कि प्रभु प्रेम और सरलता से रिझते है। उन्हें छल छिद्र नहीं भाते, हृदय में प्रेम के सागर का प्रवाह उमड़ता है। श्रृद्धा भक्ति से परिपूर्ण समर्पित होकर भक्त जब भगवान को पुकारता है तो वह उसके सहायक बनकर उबारने को दौड़े चले आते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वामित्र महामुनि थे किन्तु वन में राक्षसों के आतंक और विश्व मांगल्य की भावना से कर रहे यज्ञ में राम और लक्ष्मण को सहायक बनाने राजा दशरथ के पास गए। तब दशरथ उनके साथ जाने को तैयार होते हैं, तो महामुनि यही कहते हैं कि मुझे मारने वाले की नहीं, तारने वाले की आवश्यकता है।

बाल पंडित ने चौपाइयों-भजनों के गायन के बीच कहा कि भक्ति व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारकर नर को नारायण बना देती है। उन्होंने राम और कृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से बखान किया तो उपस्थित भाव विभोर हो उठे। बाल कथाकार ने काव्यात्मक अभिव्यक्ति में ‘परिश्रम करे कोई कितना भी लेकिन कृपा बिना काम चलता नहीं है..., कृपा सिंधु श्रीरामजी के अनुग्रह बिना मन संभलता नहीं..’ आदि संगीतमय प्रस्तुतियों से श्रोता झूमते रहे। यहां कीर्तन के दौरान पाण्डाल करतल ध्वनियों से गूंजता रहा, वहीं कई श्रद्धालु मस्ती में नाचने लगे।

इन्होंने किया व्यासपीठ का स्वागत-सम्मान
कथा के चौथे दिन व्यासपीठ सम्मान व पोथी पूजन जयंतीलाल भट्ट, महेश पंचाल, लीला कन्हैयालाल पडियार, रत्नबाला कांतिलाल उपाध्याय, रणछोड़ गर्ग, हरिलाल टेलर, प्रकाशचंद्र पंचाल, रणछोड़ पटेल, हीरालाल कलाल, जगदीश जोशी आदि ने किया। इस दौरान कल्पेश मेहता, नर्बदाबाई पटेल, धर्मेन्द्र शर्मा, कृष्णकांत टेलर, योगेश तलवाडिय़ा, संदीप सुरेका, मोहनलाल शर्मा, शिवराजसिंह चौहान, हरेंद्र पाठक, प्रवीण त्रिवेदी, सनातन मंडल कुशलगढ़, सुंदरकाण्ड मण्डल भूंगड़ा और महिला मंडल कुशलगढ़ भी सहभागी रहे। संचालन अमृतलाल पंचाल ने किया।


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