
बांसवाड़ा के आम पापड़ का स्वाद खाड़ी देशों में भी घोल रहा मिठास
जिले के डडूका में 12 परिवार करते हैं आम पापड़ बनाने का कार्य , देश के कई शहरों और विदेशों तक जाता है आम पापड़
गौरव रावल. बांसवाड़ा. डडूका. फलों का राजा आम। भला कौन होगा जो इसका मुरीद नहीं होगा। इसका रंग, रूप, स्वाद, महक सभी तो लोगों के दिलो दिमाग पर छाये हुए हैं। आम यूं तो मौसमी फल है, लेकिन आप यदि इसका बारह महीने स्वाद लेना चाहें तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आम का पापड़ आपको ये मजा देगा और इसी खूबी से आम पापड़ देश ही नहीं विदेश में भी लोगों के मुंह में मिठास घोल रहा है। आम पापड़ का बहुत बड़े पैमाने पर उद्योग तो विकसित नहीं हो पाया है लेकिन गांवों में कुछ लोग इस काम को वर्षों से करते आ रहे हैं। जिले के डडूका गांव में भी तकरीबन 12 परिवार आम पापड़ बनाने में सिद्ध हस्त हैं। इनके हाथ से तैयार आम पापड़ के स्वाद का लुत्फ लोग कुवैत, दुबई और बहरीन सरीखे देशों में भी ले रहे हैं।
रोजाना बनता है 6 क्विंटल आम पापड़
आम पापड़ बनाने वाले कारीगर ने बताया कि गांव में 12 परिवार आम पापड़ बनाते हैं। रोजाना तकरीबन 50 किलो आम पापड़ बनाया जाता है। इसकी एक खेप तैयार करने के लिए तकरीबन 18 से 20 घंटे का समय लगता है। यह काम मार्च से लेकर 15 जून तक किया जाता है। आम पापड़ अच्छी तरह सूख जाने के बाद लम्बे समय तक खराब नहीं होते हैं।
इन शहरों में बिकता है बांसवाड़ा का आम पापड़
डडूका के पापड़ की बिक्री गुजरात के दाहोद, झालोद, संतरामपुर, अहमदाबाद, सूरत, वड़ोदरा, मुम्बई, गोवा, उदयपुर , डूंगरपुर और गलियाकोट आदि शहरों में भी है।
कलमी आम का होता है उपयोग
डडूका गांव में आम पापड़ बनाने वाले परिवार सिर्फ कलमी आम का उपयोग कर ही आम पापड़ बनाते हैं। इन परिवार के लोगों ने बताया कि इस आम के उपयोग से पापड़ का स्वाद बेहतर रहता है। इसलिए इसकी मांग ज्यादा है।
Published on:
02 Jun 2018 03:43 pm
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