
लोकसभा में नियम 193 के तहत वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने जब सांसद राजकुमार रोत का नाम लेकर उन्हें कांग्रेस की 'वोट बैंक राजनीति' का हिस्सा बताया, तो उसके जवाब में रोत ने बेहद तीखा सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया है। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद ने सीधे तौर पर गृह मंत्री को निशाने पर लेते हुए #अमित_शाह_माफी_मांगे कैंपेन की शुरुआत कर दी है।
राजकुमार रोत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अमित शाह के आरोपों का जवाब देते हुए लिखा:
"अगर नक्सलवाद के नाम पर बेकसूर लोगों को मारने पर एक आदिवासी सांसद आवाज उठाता है और उसे भरे सदन में नक्सलवादी कहा जाए, तो सोचिए देश के आम आदिवासियों पर क्या जुल्म होता होगा? यह एक व्यक्ति का नहीं, पूरे आदिवासी समुदाय के सम्मान का प्रश्न है।"
सांसद रोत ने संसद को 'देश की सबसे बड़ी पंचायत' बताते हुए बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान का हवाला दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या संसद में अपने समाज की बात रखना गुनाह है? उन्होंने केंद्र सरकार पर आदिवासियों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की टिप्पणियां संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं।
सोमवार को सदन में अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) पर चर्चा के दौरान राजकुमार रोत की ओर इशारा करते हुए कहा था कि राजकुमार रोत जैसे युवा सांसद भी वोट के लालच में कांग्रेस की उस पुरानी 'विकास विरोधी थ्योरी' का समर्थन कर रहे हैं, जिसने 60 सालों तक आदिवासियों को अंधेरे में रखा। शाह ने दावा किया था कि आदिवासियों का असली विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 वर्षों के कार्यकाल में ही संभव हुआ है।
राजकुमार रोत की नाराजगी राजस्थान के आगामी राजनीतिक समीकरणों को बदल सकती है।
आदिवासी एकजुटता: रोत के इस स्टैंड के बाद डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और उदयपुर के आदिवासी बहुल इलाकों में भारी रोष देखा जा रहा है।
BAP का बढ़ता ग्राफ: भारत आदिवासी पार्टी (BAP) इस मुद्दे को भुनाकर खुद को आदिवासियों की एकमात्र रक्षक पार्टी के रूप में पेश कर रही है, जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए आदिवासी वोट बैंक को साधना चुनौतीपूर्ण होगा।
Updated on:
01 Apr 2026 11:16 am
Published on:
01 Apr 2026 11:16 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
