
गूगल मैप में बांसवाड़ा जिले की घाटोल तहसील की मियासा पंचायत
Rajasthan Area Without Electricity: देश आजादी के 78 साल पूरे कर चुका है और शहरों में डिजिटल इंडिया की चमक दिखाई दे रही है, लेकिन बांसवाड़ा जिले की कुछ बस्तियां आज भी अंधेरे में जिंदगी काटने को मजबूर है। सूरज ढलते ही यहां चिमनियों की लौ ही रोशनी बनती है। पंखा, कूलर और टीवी जैसी सुविधाएं लोगों के लिए सपना है। मोबाइल चार्ज करने के लिए भी तीन किलोमीटर दूर बाजार जाना पड़ता है।
सरकारी योजनाओं और सोलर सिस्टम के बावजूद इन गांवों तक बिजली अब तक नहीं पहुंच पाई है। बांसवाड़ा जिले की घाटोल तहसील की मियासा पंचायत की वाणियावेला और मुडासेर पंचायत की सिंहपुरा बस्ती के 150 से अधिक घरों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है। वर्ष 2022-23 में यहां सोलर पैनल लगाए गए थे, लेकिन एक साल में बैटरियां जवाब दे गई। बाद में ग्रामीणों ने सौभाग्य योजना में आवेदन किया तो गांव सोलर इलेक्ट्रिफाइड घोषित होने के कारण निःशुल्क कनेक्शन नहीं मिले।
ग्रामीण तोलाराम निनामा और प्रभूलाल ने बताया कि बिजली नहीं होने से बच्चों को 10वीं के बाद बाहर पढ़ने भेजना पड़ता है। दूसरे गांवों के लोग यहां अपनी बेटियों का रिश्ता नहीं करते। वे उलाहना देते हैं कि यहां पंखा-कूलर कुछ नहीं तो बेटी कैसे रहेगी।
ग्रामीणों के पास मोबाइल तो हैं, लेकिन बैटरी बचाने के लिए केवल कॉल करने तक सीमित रहते हैं। चार्जिंग के लिए लगभग 3 किमी दूर जाना पड़ता है, जहां 10 रुपए देकर मोबाइल चार्ज करवाते हैं। कई बार समय और साधन की कमी के कारण मोबाइल चार्ज भी नियमित नहीं हो पाता। बिजली के अभाव में आज भी टीवी-रेडियो नहीं है, जिससे ग्रामीण देश-दुनिया की खबरों से बेखबर रहते हैं। इसके अलावा मूलभूत सुविधाएं जैसे पंखा, कूलर और फ्रिज तक की सुविधाएं यहां अभी भी एक ख्वाब हैं।
गांव सोलर इलेक्ट्रिफाइड घोषित होने से यहां सौभाग्य योजना में लोगों के कनेक्शन नहीं हो पाए। कुछ कनेक्शन की फाइल लगाई थी, लेकिन डिमांड नोटिस चुकाने में असमर्थ होने पर कनेक्शन नहीं हुए। एईएन को बुलाकर लोगों से ग्रुप में आवेदन करवाने को कहा है। यहां 11 केवी की लाइन आ रही है। जल्द ही एलटी लाइन खिंचवाई जाएगी।
भगवान दास बैरवा, एसई, एवीवीएनएल, बांसवाड़ा
Published on:
19 May 2026 08:24 am
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