
बांसवाड़ा. एक ओर जहां घरों में अभिभावक अपने लाडली-लाडलों के हाथों में गाड़ी की चाबियां थमाकर बेफिक्र हैं। वहीं, इन नौनिहालों के फर्राटे सडक़ों पर लोगों का चलना तक दुश्वार कर रहे हैं। रफ्तार के साथ अनाड़ी चालकों के कारण शहर की सडक़ों और गलियों में बुजुर्ग और आम लोगों का तो गन्तव्य पहुंचने की कोई गारंटी नहीं रह गई है। छुट्टी के दिन या खास मौकों पर ही नहीं बल्कि रोजमर्रा के इनके फर्राटों ने हर शख्स के मन में दुर्घटना का खौफ बिठा दिया है।
मुख्य सडक़ों और बाजार में भी दुर्घटना का खौफ नहीं
बच्चों के द्वारा वाहन दौड़ाने जैसी गतिविधि गलियों और मोहल्लों तक ही सीमित नहीं है। बल्कि मुख्य सडक़ों और मुख्य बाजारों में भी ये अनाड़ी चालक सभी को तंग करते नजर आ जाते हैं। फिर चाहें भीड़भाड़ वाला सदर बाजार हो या पुराना बस स्टैंड या कस्टम चौराहा या उदयपुर रोड सभी स्थानों पर बेतरतीब तरीके से गाड़ी दौड़ते इन वाहन चालकों में न तो स्वयं की फिक्र होती है और न ही दूसरों की। बिना नियम कायदोंं के ये बच्चे इन सडक़ों और इलाकों से यूं गुजरते हैं जैसे किसी व्यस्त मार्ग पर नहीं बल्कि रेस ट्रैक पर हो।
माता-पिता हैं जिम्मेदार
शहरवासी मुनीश गुप्ता ने बताया कि बच्चों को वाहन देने को लेकर न तो उनके माता पिता लगाम लगाने को तैयार हैं और न ही स्कूल प्रबंधन। हर कोई बच्चों को वाहन चाहते देख गर्व महसूस करते हैं। जो बिल्कुल गलत है। बच्चो के वाहन चलाने के लिए पूरी तरह माता-पिता जिम्मेदार हैं।
लगनी चाहिए लगाम
व्यापारी निलेश सोनी ने बताया कि शहर में बच्चे काफी तेज और बेतरतीब तरीेके से गाड़ी दौड़ाते हैं। कई बार दुर्घटना होती रहती है। इन्हें रोकेने के लिए माता=पिता और परिजनों को सजग होना होगा। अन्यथा कभी भी इन बच्चों के साथ या अन्य किसी के साथ दुर्घटना हो सकती है।
स्वयं भी होते हैं दुर्घटना के शिकार
अंकित त्रिवेदी ने बताया कि बच्चे बहुत तेज गति में वाहन चलाते हैं। जो दूसरों के लिए कष्टकारी तो है ही साथ ही उनके स्वयं के लिए भी काफी तकलीफदेय है। कई बार ऐसे वाहन दौड़ाने वाले बच्चों को भी चोट लगती है। इसके बाद भी ये वाहन चलाने में पीछे नहीं हटते।
बाइक सवार किशोर ने मारी टक्कर
बांसवाड़ा. हाउसिंग बोर्ड इलाके में सोमवार सुबह बाइक सवार एक किशोर से पैदल जा रहे बच्चे को टक्कर मार दी। जिससे बच्चे के पैर में गंभीर चोट आ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अमरदीप नगर निवासी किशोर तेज रफ्तार बाइक से जा रहा था। बच्चे के सडक़ पार करने के दौरान बाइक चालक से नियंत्रण खो दिया और बच्चे से टकरा गया। जिसमें बच्चे के पैर में गंभीर चोट आई और उसे उपचार के लिए आनन-फानन हाउंसिग बोर्ड डिस्पेंसरी पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे के परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए। बच्चे की मां ने बताया कि उनके बच्चे के पैर में दो जगह फ्रैक्चर हुआ है। जिसे ऑपरेशन के लिए कोटा लेकर निकल गए हैं।
माता-पिता लगा सकते हैं लगाम
बच्चों के द्वारा वाहन चलाने के प्रति माता-पिता पूरी तरह जिम्मेदार हैं। माता-पिता ही सख्ती बरतकर इन्हें रोक सकते हैं। कई बार पुलिस के द्वारा इन्हें रोकने के प्रयास भी किए गए। लेकिन परिजनों की नजरअंदाजी के कारण यह समस्या बढ़ती जा रही है।
भंवर सिंह राठौड़, यातायात निरीक्षक
Published on:
02 Jan 2018 01:18 pm

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