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जगमेरू पहाड़ी को आगोश में ले रहे बादल

Clouds engulfing Jagmeru hill सौ टापूओं के शहर बांसवाड़ा में खूबसूरती एवं हरितिमा के भी कई बेजोड़े स्थल है। इनमें जगमेरू पहाड़ी तो शहरी ही नहीं वरन् प्रदेश व आसपास के लोगों के दिलाें के करीब है। यहां शीतलता प्रदान करती बयारों के साथ ही अठखेलियां करते बादल भी लोगों के आनंद को दुगना कर देते है।

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जगमेरू पहाड़ी को आगोश में ले रहे बादल

जगमेरू पहाड़ी को आगोश में ले रहे बादल

Clouds engulfing Jagmeru hill सौ टापूओं के शहर बांसवाड़ा में खूबसूरती एवं हरितिमा के भी कई बेजोड़े स्थल है। इनमें जगमेरू पहाड़ी तो शहरी ही नहीं वरन् प्रदेश व आसपास के लोगों के दिलाें के करीब है। यहां शीतलता प्रदान करती बयारों के साथ ही अठखेलियां करते बादल भी लोगों के आनंद को दुगना कर देते है।

जिला मुख्यालय से करीब पन्द्रह किमी दूर माहीडेम रोड पर जगमेरू यानी जगमेर पहाड़ी िस्थत है। यहां पहाड़ी एक श्रृंखला में दूरदराज तक ऊंचाई लिए हुई देखी जा सकती है। यह स्थल शहर में एक नए पिकनिक स्पाॅट के रूप में उभरा है। माही नदी की अथाह जलराशि एवं ऊंची-ऊंची पहाड़ियां मानसून के कारण हरितिमा की चादर ओढ़ हुए है। यहां शिखर पर बादलों का डेरा रहता है। ऐसे में बारिश में यहां का मंजूर बेहद खूबसूरत रहता है।

छुट्टी में रहती है भीड़
यहां हरी भरी पहाडि़यों मेें करीब डेढ हजार मीटर सबसे ऊंची है जगमेरू की पहाड़ी। पहाड़ी का नामांकरण बांसवाड़ा के प्रथम राजा जगमाल सिंह के नाम पर है। बरसात के मौसम में तो यहां विशेष चहल पहल रहती है। रविवार या अन्य अवकाश के समय तो शहर के साथ ही आसपास के कस्बों व जिलों तथा गुजरात व एमपी से भी लोग परिवार समेत यहां पिकनिक मनाने आते है। यहां 16वीं शताब्दी का प्राचीन हनुमान मंदिर भी है। यहां अति प्राचीन शिलालेख भी है, इसमें पूर्व महाराज जगमाल सिंह के जीवनकाल का उल्लेख है।

पैराग्लाइडिंग नहीं हो सकी शुरू

जगमेर हनुमान पहाड़ी को पर्यटन केन्द्र के नक्शे पर उभेरने एवं पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां पैराग्लाइडिंग एडवेंचर की शुरूआत भी हुई। पूर्व जिला कलक्टर अंकित सिंह ने यहां पैराग्लाइडिंग की और क्षेत्र की पहाडि़यों का निरीक्षण तक किया, लेकिन यह योजना मंजूरी के अभाव में अमलीजामा नहीं पहन सकी।

रास्ते दुर्गम व पथरीले

पर्यटक बताते है कि जगमेर घाटे की चढ़ाई के समय का रास्ता पूरी तरह से उधड़ा हुआ है। यहां गहरे गड्ढे लम्बी दूरी तक पसरे हुए है। ऐसे में चढ़ाई कष्ट दायक रहती है। यहां रोड लाइट नहीं है। रात के समय में आने जाने में काफी दिक्कतें होती है। यहां आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। कैंपियन साइड भी वन विभाग ने नहीं कर रखी है।

इको टूरिज्यम की योजना
पहाड़ी का इलाका वन क्षेत्र में है, यहां पक्के एवं स्थाई निर्माण की स्थानीय स्तर पर मंजूरी नहीं है। क्षेत्र को ईको टूरिज्यम के रूप में विकसित करने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। निचले हिस्से में पर्यटकों को सुविधा मिलें, यह क्षेत्राधिकार स्थानीय पंचायत का है।सतीश जैन, एसीएफ, बांसवाड़ा


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