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राजस्थान के इस जिले की निंबोली का हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडू तक डंका

दवा, खाद और सौदंर्य प्रसाधनों के उपयोग में आती है काम

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banswara

राजस्थान के इस जिले की निंबोली का हरियाणा, उत्तराखंड और तमिलनाडू तक डंका

बांसवाड़ा. यूं तो बांसवाड़ा की सरजमीं अपने आंचल में प्रकृति की हजारों नियमतें समेटे हुए है। लेकिन कुछ ऐसी हैं जो यहां के ग्रामीणों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फायदा दिला रही हैं। साथ ही दूसरे प्रदेश के व्यापारियों को यहां तक खींच रही हैं। ऐसी ही सामान्य सी वस्तु का डंका सिर्फ प्रदेश ही नहीं बल्कि कई प्रदेशों में बज रहा है। आपको जानकार हैरत होगी कि बांसवाड़ा की आबोहवा को खुशनुमा बनाने वाली और सेहत के लिए गुणकारी नीम की निंबोली की मांग कई राज्यों में है। जिस कारण प्रत्येक वर्ष सैकड़ों क्विंटल निंबोली बांसवाड़ा से खरीद कर ले जाई जाती है।

पकी निंबोली की डिमांड
गर्मी में नीम के पेड़ों पर लगने वाली निंबोली को छोटे व्यापारी जुलाई तक एकत्रित कर बड़े व्यापारियों को बेच देते हैं। जिसके बाद ये व्यापारी इसे दूसरे राज्यों में भेजते हैं। व्यापारियों ने बताया कि पकी हुई निंबोली की अधिक मांग है। हरी निंबोली कुछ दिन में खराब हो जाती है और उपयोग में नहीं आ पाती है। व्यापारियों के द्वारा खरीद फरोख्त तकरीबन 10 जून से 10 जुलाई तक एक माह ही चलती है।

चार-पांच वर्षों में पकड़ा जोर
व्यापारी दिनेश दोसी ने बताया कि जिले में चार-पांच वर्षों में खूब जोर पकड़ा है। निंबोली का व्यापार जिले में बढऩे के कारण दूर-दूर से बड़ी कम्पनियों के प्रतिनिधि सौदा करने के लिए आते हैं। हाल ही में एक संस्था द्वारा एकमुश्त 30 हजार टन निंबोली की मांग की गई थी। इतनी बड़ी मात्रा में उन्हें निंबोली उपलब्ध नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि वैसे तो यह व्यापार पिछले 10-12 वर्षों से चल रहा है, लेकिन तब बहुत छोटे पैमाने पर था। अब काफी बढ़ गया है।

पूरे जिले में हैं व्यापारी
निंबोली की खरीद-फरोख्त करने वाले स्थानीय व्यापारी पूरे जिले में हैं। जो ग्रामीण और छोटे दुकानदारों से सीधे माल खरीदते हैं। ये व्यापारी बांसवाड़ा, कुशलगढ़, बागीदौरा, घाटोल और आबापुरा आदि क्षेत्रों में हैं।

इन राज्यों में जाती है निंबोली
बागीदौरा के अनाज व्यापारी नयन दोसी ने बताया कि बांसवाड़ा में मई-जून में निंबोली को एकत्रित किया जाता है। जिसके बाद यह चूरू, हरियाणा, उत्तराखंड के जसपुर, काशीपुर सहित अन्य कई जगह भेजी जाती है। शहर के व्यापारी नवीन ने बताया कि यहां निंबोली तमिलनाडु के कई शहरों में आपूर्त होती है। सरकार भी इनकी खरीदी करती है।


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