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गंभीर संकट : ब्लड बैंक में सिर्फ एक दिन की जरूरत का खून, अब सिर्फ रक्तदाताओं से आस

600 यूनिट की क्षमता है ब्लड बैंक की, अब रक्तदाताओं से ही संकट खत्म होने की आस, रोज की खपत 20 यूनिट, निगेटिव ग्रुप का ब्लड खत्म

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banswara

गंभीर संकट : ब्लड बैंक में सिर्फ एक दिन की जरूरत का खून, अब सिर्फ रक्तदाताओं से आस

बांसवाड़ा रक्त इंसान के जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है। किसी रोग से पीडि़त अथवा दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तत्काल रक्त की जरूरत होती है। वैसे तो लोग रक्तदान का पुनीत कार्य स्वेच्छा से करते रहे हैं और इससे जरूरतमंदों को रक्त की उपलब्धता होती रही है, लेकिन महात्मा गांधी अस्पताल में जिले के एकमात्र ब्लड बैंक में एकाएक रक्त का संकट खड़ा हो गया है। छह सौ यूनिट क्षमता के बैंक में इस समय बहुत मामूली मात्रा में रक्त उपलब्ध है। रक्त का संकट तत्काल दूर करने की जरूरत है।

इसके लिए राजस्थान पत्रिका ‘आओ करें रक्तदान, अपनों को दें जीवनदान’ अभियान शुरू कर रहा है। अभियान के तहत लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करने , रक्त की उपलब्धता बढ़ाने के उपाय करने, लोगों की रक्तदान के प्रति भ्रांतियां दूर करने आदि विषयों पर समाचार अभियान शुरू कर रहा है। इसके साथ रक्तदान शिविर आयोजित कर ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता बढ़ाने का काम किया जाएगा। इसी कड़ी में सबसे पहले राजस्थान पत्रिका टीम के सदस्य बुधवार को रक्तदान करेंगे। पेश है समाचार श्रृंखला की पहली कड़ी के तहत पेश है आशीष बाजपेई की रिपोट...र्

बांसवाड़ा. जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में खून का संकट खड़ा हो गया है। 600 यूनिट क्षमता वाले इस बैंक में वर्तमान में महज 25 यूनिट ही ब्लड उपलब्ध है। जबकि एमसीएच विंग और अस्पताल के अन्य वार्डों में रोजाना 15 से 20 यूनिट ब्लड की खपत है। समस्या इस कदर गंभीर है कि निगेटिव ब्लड ग्रुप में सिर्फ एक यूनिट ही उपलब्ध है। इस संकट के कारण सडक़ हादसों में गंभीर रूप से घायलों व गर्भवतियों के लिए समस्या खड़ी हो गई है।

इसलिए खड़ा हुआ संकट
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में बने ब्लड बैंक में ब्लड की 80 फीसदी जरूरत शिविरों से उपलब्ध होने वाले रक्त से पूरी होती है, लेकिन मई में एक भी शिविर न लगने के कारण रक्त उपलब्ध नहीं हो सका।

रोज 15 से 20 यूनिट ब्लड की खपत
पूरे जिले में सिर्फ एक ही ब्लड बैंक है। इस कारण यहां रोजाना 15 से 20 यूनिट ब्लड की खपत है। इसमें थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों, बंदीगृह के रोगियों, एचआईवी पीडि़तों व अन्य गंभीर बीमारी से पीडि़त रोगियों को बिना रिप्लेसमेंट के ब्लड देने की वरीयता भी है। इसके अलावा 12 वर्ष से छोटी बच्चियों को भी बिना रिप्लेसमेंट के रक्त दिया जाता है।

इसलिए रक्तदान आवश्यक
महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रवीण गुप्ता का कहना है इस वर्ष जनवरी से अप्रैल तक कुल 903 यूनिट ब्लड सप्लाई किया गया। जिसमें 500 यूनिट बिना रिप्लेसमेंट के दिया गया। अधिक संख्या में बिना रिप्लेंसमेंट के ब्लड उपलब्ध कराने के कारण खून की डिमांड अधिक रहती है। लेकिन भ्रांतियों में फंसे होने के कारण अधिकांश ग्रामीण खून देने से कतराते हैं। जबकि रक्तदान करना महादान है इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। इसलिए सभी स्वस्थ्य लोगों को रक्तदान करना चाहिए ताकि जरूरतमंदों की जान बचाई जा सके।

चार माह में 470 यूनिट, लगे 13 शिविर
इस वर्ष जनवरी से लेकर अप्रेल माह तक 470 यूनिट रक्त ब्लड बैंक में आया। इसमें 350 यूनिट ब्लड रक्तदान शिविरों से प्राप्त हुआ। वहीं, 120 यूनिट ब्लड स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने दान किया।

रक्तदान के लिए यह जरूरी
रक्तदाता की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच हो और वजन 45 किग्रा से अधिक हो।
एक माह में टेटू या शरीर का अंग छेदन नहीं कराया हो।
हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से ज्यादा हो
रक्तदाता ने तीन माह में कहीं रक्तदान न किया हो।
रक्तदाता किसी गंभीर बीमारी एवं एड्स, क्षय, रति ?, पीलिया, मलेरिया, मधुमेह आदि से ग्रसित न हो।
दो घंटे पहले कुछ खाया जरूर हो।