
स्वैच्छिक रक्तदान दिवस : रक्तदाताओं को उठाना होगा लोगों को प्रेरित करने का बीड़ा, ताकि दूर हो सके किसी जरुरतमंद की पीड़ा
बांसवाड़ा. 01 अक्टूबर यानि स्वैच्छिक रक्तदान दिवस, रक्तदान जागरुकता के लिए हर साल 01 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया जाता है। जिले की एक दो नहीं बल्कि कई सस्थाएं रक्तदान के इस पुनीत कार्य में लगी हुई है। रक्तदान को लेकर पिछले कई वर्षों में जागरुकता भी बढ़ी है लेकिन जनजाति क्षेत्र में यह नाकाफी है। लोगों में रक्तदान को लेकर भ्रांतियों की कमी नहीं है और सरकार के साथ आमजन को भी इन भ्रांतियों को दूर करने के प्रयास करने चाहिए ताकि लोग रक्तदान के लिए प्रेरित हो।
रक्तदान को लेकर भ्रांतियां
वैसे तो जनजाति क्षेत्र के लोगों में शिक्षा की कमी हर परेशानी का कारण है। यही कारण रक्तदान की भ्रांति की रूप में भी यहां व्याप्त है। कई लोगों का मानना है कि रक्तदान करने से कमजोरी आती है और अन्य बीमारियां शरीर को लग जाती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है। रक्तदान करने के लिए गाइडलाइन बनी हुई है। इसके लिए उम्र, वजन और हीमोग्लोबिन आदि भी निर्धारित है जिसके अनुसार रक्तदान किया जा सकता है।
रक्तदान जरूरी है
रक्तदाताओं की कमी की वजह से कई बार ब्लड बैंकों में भी रक्त की कमी हो जाती है। ऐसा भी अमूमन देखने में आता है कि जागरुकता की कमी के कारण लोग अपने परिजनों को भी रक्त देने से पीछे हट जाते है। ऐसे में जरुरतमंदों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ जाता है। खासकर थैलेसीमिया, ल्यूकिमिया, हीमोफीलिया आदि के रोगियों की तो जान पर बन आती है।
रक्तदाताओं से प्रेरित हों
रक्त की बढ़ती जरुरत के साथ साथ लोगों में जागरुकता भी आ रही है। कई लोगों ने नियमित रक्तदान को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। ऐसे ही कई शख्स जिले में मौजूद है जो किसी भी समय रक्तदान करने में पीछे नहीं हटते। कई लोगों और युवाओं ने तो अपने स्तर पर शहर के रक्तदाताओं का सोशल मीडिया पर ग्रुप बना रखे है साथ ही अलग अलग रक्त समूह के लोगों से भी संपर्क साधे हुए है जिससे कि मुश्किल की घड़ी में किसी की जान बचाने के लिए बिना किसी विलंब के रक्तदाता से संपर्क किया जा सकता है।
Published on:
01 Oct 2018 03:07 pm
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