
Increased awareness of blood donation in bhilwara
जबलपुर. ब्लड डोनेट करके आप किसी की जिंदगी बचा सकते हैं। यह नेक काम करने में संस्कारधानी के युवा सबसे आगे हैं। इसका अंदाजा शहर में चल रहे ब्लड डोनर्स ग्रुप से लगाया जा सकता है। खास बात यह देखने में आई है कि इन ग्रुप्स में गल्र्स भी तेजी से एक्टिव हो गई हैं। अब वह भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे लोगों को अपना खून दे रही हैं, ताकि उनकी जिंदगी बच पाए। कुछ समय पहले की बात की जाए तो गर्ल्स ब्लड डोनेट करने से घबराती थीं। इसके साथ ही एनीमिक होना भी एक बड़ी समस्या है। कॉलेजों में लगने वाले रक्तदान शिविरों में गल्र्स की भी भागीदारी हो रही है। नेशनल वॉलेंटरी ब्लड डोनेशन डे के मौके पर आइए मिलते हैं हम ऐसी ही गर्ल्स से जिन्होंने ब्लड डोनेशन के लिए उत्सुकता दिखाई।
एनिमिक होने की वजह से गर्ल्स कम
गर्ल्स का प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन यह पुरुषों के बराबर नहीं है। इसका बहुत बड़ा रीजन यह है कि गर्ल्स एनीमिक होती हैं। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण उनका ब्लड नहीं लिया जा सकता है। यही वजह है कि गर्ल्स का रेशो थोड़ा कम है। इसके लिए जरूरी है कि गर्ल्स हेल्दी डाइट लें और हिमोग्लोबिन का लेवल बढ़ाएं।
40 हजार कलेक्शन जरूरत दोगुने की
विशेषज्ञों के मुताबिक हर वर्ष विभिन्न शिविरों, स्वैच्छिक रक्तदान और मरीजों के परिजनों द्वारा तकरीबन 40 हजार यूनिट ब्लड कलेक्ट होता है। यह आंकड़े सभी सरकारी और निजी ब्लड बैंक मिलाकर है, जबकि पूरे शहर में हर वर्ष इससे दोगुने ब्लड की डिमांड होती है।
गर्ल्स का रेशो पहुंचा 18 प्रतिशत तक
एल्गिन हॉस्पिटल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. संजय मिश्रा ने बताया कि पिछले तीन-चार सालों की बात करें तो अब गर्ल्स में अवेयरनेस आई है। वह भी ब्लड डोनेट करने में दिलचस्पी दिखा रहीं हैं। पिछले कुछ सालों तक गल्र्स का रेशो जहां पांच से आठ प्रतिशत तक होता था, वहीं अब यह रेशो 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब यह है कि धीरे-धीरे गर्ल्स में ब्लड डोनेशन को लेकर जो भ्रांतियां थी, वह दूर होती जा रही हैं।
कई संस्थाएं हैं एक्टिव
- इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी
- दिशा वेलफेयर सोसायटी
- मां रेवा रक्तदान सेवा समिति
- रेड नैक्टर ब्लड डोनर्स ग्रुप
- जबलपुर रक्तदाता समूह
- जिला स्वयंसेवक इकाई
- एनसीसी दल
अभी तक पांच बार ब्लड डोनेट कर चुकी हूं और रक्तदान कर बेहद खुशी महसूस होती है। किसी की जिंदगी बचाने से बढ़कर कोई और नेक काम नहीं है। यह सोचकर लगातार ब्लड डोनेशन के लिए जुटी हुई हूं। आगे भी यही प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक लोगों के काम आ सकूं।
प्रिया कामतकर
पहले ब्लड डोनेशन के नाम पर थोड़ा घबराहट होती थी, लेकिन जब एक बार ब्लड दिया तो यह घबराहट दूर हो गई। अभी तक तीन बार ब्लड डोनेट कर चुकी हूं और मैंने यह संकल्प किया है कि जब भी किसी को ब्लड की जरूरत होगी मैं हमेशा तैयार रहूंगी।
सुप्रिया राज
Published on:
01 Oct 2018 07:07 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
