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बाढ़ नियंत्रण कक्ष राम भरोसे : देर रात माही का जलस्तर नहीं बता पाए कर्मचारी, बोले- फाइल नहीं मिल रही है

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बाढ़ नियंत्रण कक्ष राम भरोसे : देर रात माही का जलस्तर नहीं बता पाए कर्मचारी, बोले- फाइल नहीं मिल रही है

बांसवाड़ा. प्रदेश में मानसून परवान पर है। नदी-नाले उफान पर हैं। उदयपुर संभाग के सबसे बड़ा माही बांध में भी अथाह जलराशि आ चुकी है और अब बढ़ते जलस्तर पर हर समय निगाह जरूरी है लेकिन इसकी निगरानी राम भरोसे है। रविवार रात बाढ़ नियंत्रण कक्ष पर जब जलस्तर की जानकारी मांगी तो वहां तैनात कार्मिक के पास इसकी सूचना नहीं थी और सरकारी कर्मचारी तो ड्यूटी से ही नदारद ही बताया गया। राजस्थान पत्रिका संवाददाता ने शनिवार तथा रविवार रात 12 बजे बाढ़ नियंत्रण कक्ष के फोन नम्बर 02962-240945 पर संपर्क कर यह जाना चाहा कि बांध का जलस्तर क्या है लेकिन दोनों दिन इसका जवाब नहीं मिल पाया।

शनिवार को देर रात वहां नियुक्त भव्य पण्ड्या ने फोन उठाया और उनसे जब माही का जलस्तर पूछा गया तो उन्होंने शाम 5 बजे बाद कोई अपडेट नहीं होना बताया। इसके बाद रविवार को तो हालात इससे भी अधिक खराब मिले। रात करीब 12:15 पर फोन पर पण्ड्या ने कहा कि शाम की शिफ्ट में नियुक्त कार्मिक फाइल कहीं रख गए हैंं, जिससे वह माही बांध का जलस्तर नहीं बता सकता। करीब 10 मिनट तक फोन चालू रहा और वह फाइल तलाशत रहा लेकिन इसके काफी देर बाद भी फाइल नहीं मिली। बांध का जलस्तर पता नहीं होने का कारण पूछने पर उसने अपने टीम लीडर का नंबर देकर उनसे बात करने को कहा। अन्य सूत्रों ने माही का जलस्तर 278 मीटर के पार होना बताया।

फाइल नहीं मली
टीम लीडर विकास ने कहा कि फिलहाल फाइल नहीं मिल रही है। फाइल मिलने पर माही का जलस्तर फोन करके बता सकता हूं। इसके बाद उसका फोन तो आया पर वह अपडेट जलस्तर नहीं बता सका। उसने कहा कि बारिश के सभी स्टेशन के साथ ही सुबह 8 बजे माही का जलस्तर भी लिया जाता है। इसके लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने इसके इंतजाम की भी बात कही। पर, रात करीब दो बजे तक संपर्क में रहने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला।

4 माह में लाखों रुपए खर्च
बाढ़ नियंत्रण कक्ष में फिलहाल 33 कार्मिक नियुक्त हैं, जो तीन शिफ्ट में कार्यरत हैं। इसमें प्रत्येक शिफ्ट में 11-11 कार्मिक हैं। इस सब पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह नियंत्रण कक्ष जिला कलक्ट्री में करीब 4 माह के लिए स्थापित किया जाता है, लेकिन यह सिर्फ बारिश कितनी हुई इस तक समिति हैं।


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