
मिसाल : जैन समाज के संत भवन में भागवत कथा का आयोजन, ‘णमो’ के मंच से गूंज रहा ‘नारायण-नारायण’
बांसवाड़ा. एक-दूसरे का सहयोग। दूसरे धर्म को सम्मान देना। इंसानियत को सर्वोपरि मान जरूरतमंदों की मदद करना। हर धर्म यही सीख देता है और इसी सीख को आत्मसात करते हुए बाहुबली कॉलोनी जैन समाजजनों ने अनूठी मिसाल पेश कर व दूसरे धर्म को सम्मान देकर आपसी सौहाद्र्र का जो संदेश दिया है, वह लोगों को धर्म लाभ के साथ ही अन्य समाजजनों को प्रेरित कर रहा है। बाहुबली विकास समिति की ओर से इस वर्ष भागवत कथा के आयोजन का निर्धारण किया था। कार्यक्रम की रूपरेखा तय होने के बाद समिति पदाधिकारियों ने जैन समाजजनों से चर्चा की तो उन्होंने पूर्ण सहयोग कर कथावाचक एवं सहयोगियों के ठहरने की व्यवस्था की। साथ ही बारिश के मौसम को देखते हुए संत भवन में कथा कराने की अनुमति दी। इसके बाद जैन गुरुओं और समाज की धार्मिक कार्यक्रम को कराने के उद्देश्य से बनाए संत भवन में भागवत कथा का आयोजन आमजन के लिए मिसाल बन गया है।
ऐसा 14 वर्षों में कहीं नहीं देखा
कथावाचक अंशुमान व्यास का कहना है कि वागड़ में कथा करने का अवसर पहली बार मिला। पहली बार में ही जो अनुभूति हुई वो पहले कभी नहीं हुई। जहां कथा हो रही है वह स्थान जैन संतों के ठहरने का प्रबंध के साथ ही विविध धार्मिक आयोजन के लिए है। उसके बाद भी जैन समाजजनों ने कथा के लिए भवन को समर्पित कर दिया। मैंने 15-16 वर्ष के कथावाचन के दौर में पहली बार दो समाजों के बीच सौहार्द और आपसी प्रेम देखा है। जो काफी सराहनीय है।
आपसी प्रेम बढ़े
पंकज जैन ने बताया कि संत भवन में जैन समाज के कार्यक्रम होते हैं। जब कथा आयोजकों ने गोशाला के करीब कथा कराने की बात कही तो मैंने भवन में कथा कराने के लिए कहा, ताकि श्रावकों और कथावाचक को किसी प्रकार की असुविधा न हो और बारिश भी व्यवधान न डाल सके। इससे दोनों समाजों में आपसी प्रेम भी बढ़ेगा। यही सब कुछ सोच कर कथा भवन में कराने की बात रखी।
आर्थिक लाभ भी
आयोजक समिति के मोहनलाल पंड्या ने बताया कि कथा आयोजन के लिए संत भवन समर्पित करने और कथा वाचक एवं दल के लिए व्यवस्था करने से समिति को आर्थिक लाभ भी हुआ। कम बजट में कथा आयोजित होना संभव हो रहा है। जैन समाजजनों का प्रेम और सौहाद्र्र से सभी प्रफुल्लित भी हो रहे हैं। यह अपने आप में सराहनीय है और सभी के लिए प्रेरणादायी है।
सहयोग प्रशंसनीय
जैन मुनि सुयशसागर का कहना है कि धन्य होते हैं वे सभी आयोजक, जो ऐसे आयोजनों में तन, मन, धन से समर्पण करते हैं। समाजजनों विशेषकर पंकज जैन का सहयोग प्रशंसनीय है। जिन्होंने संत भवन में कथा कराने की अनुमति देकर व्यवस्थाएं की।
नृसिंह अवतार का किया वर्णन
बांसवाड़ा. संत भवन में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे वाचक पं. अंशुमान व्यास ने दान-पुण के महत्व को बताया। उन्होंने बताया कि दान-पुण्य करने से धन की पवित्रता बढ़ती है। प्रत्येक को नियमित तौर जितना संभव हो उतना दान करने की बात कही। इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों को नियमित पढऩे पर भी जोर दिया। कथा के दौरान नृसिंह अवतार का भी वर्णन किया गया और झांकी प्रस्तुत की गई। प्रारंभ में दशामाता मंदिर गादिपति राजूबेन से महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
Published on:
30 Aug 2018 03:03 pm
बड़ी खबरें
View Allबांसवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
