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जन्नत से कम नहीं माही का बैक वाटर क्षेत्र, लेकिन यहां के लोगों के लिए जन्नत में भी जारी है ‘जिंदगी की जंग’

Mahi Dam Banswara : जन्नत के बीच जिंदगी का कठिन सफर, नाव से करना पड़ रहा आना-जाना, जोखिम भी उठाते हैं ग्रामीण

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जन्नत से कम नहीं माही का बैक वाटर क्षेत्र, लेकिन यहां के लोगों के लिए जन्नत में भी जारी है 'जिंदगी की जंग'

जन्नत से कम नहीं माही का बैक वाटर क्षेत्र, लेकिन यहां के लोगों के लिए जन्नत में भी जारी है 'जिंदगी की जंग'

दिनेश तंबोली/बांसवाड़ा.उदयपुर संभाग का सबसे बड़ा माही बांध लबालब होने और उस पर सोलह गेट से धवल जल का ज्वार देख लोगों के चेहरे दमक उठे। बांध के बीच के टापुओं और किनारे के पहाडिय़ों पर हरियाली की चादर भी आंखों को सूकून दे रही है और इस नैसर्गिक छटा को निहारने के लिए दूर दूर से लोग वहां पहुंच भी रहे हैं, लेकिन बांध भरने के बाद सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि बैक वाटर में चाचाकोटा व काकनसेजा क्षेत्र के पहाड़ी भू-भाग पर बसे कई आदिवासी परिवारों के लिए इस जन्नत का सिर्फ यही लाभ है कि वे शुद्ध आबोहवा में सांस ले रहे हैं अन्यथा उनकी जिंदगी संघर्ष की नई राह पर आ खड़ी हुई है। उनके घर और खेत चारों ओर से पानी से घिर गए हैं। मगरमच्छ जैसे जीवों का खतरा भी उन पर मंडराने लगा है। बच्चों को स्कूल जाना हो या बीमार को अस्पताल ले जाना हो अथवा अन्य रोजमर्रा के काम के लिए गांव में जाना हो नाव ही सहार बचा है। जहां जलस्तर कम है वहां ये लोग खतरा मोल लेकर पानी को पैदल ही पार कर रहे हैं। मजबूरी यह भी है कि उनके रहने का कोई आसरा अन्यत्र नहीं है और न ही दूसरी जगह जमीन है। ऐसे में यहीं रहकर खतरों के बीच जिंदगी बसर कर रहे हैं।

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बिखरी बस्तियां, आफत ज्यादा
इन दिनों गेमनपुल से सटे गांवों में कई मकान पानी से घिरे हुए हैं। घर की दहलीज पार कर आगे बढऩे के लिए लोग नाव का सहारा लेते हैं। इसके अलावा भी चाचाकोटा के समीप , कोटड़ा, ठीकरिया, पाड़ला, दनाक्षरी, खादुड़ी पाड़ा नारलिया सहित कई गांव ऐसे भी हंै, जहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं है। कई लोगों के तो खेत भी जल मग्न हो गए हैं। आमजन के साथ-साथ पशुओं के लिए भी बरसात के मौसम में व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती है। बेक वाटर के आसपास के अंदरुनी गांवों में रोजमर्रा की आवश्यक साधन-सुविधा भी नहीं होने से परेशानियां आती हैं। कोटड़ा के नाथू भाई कहते हैं कि क्षेत्र के विशेष विकास एवं लोगों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए। माही बैक वाटर से टापू में तब्दील चाचाकोटा के मकान में जीवन बसर कर रहे परिवार की पिंका देवी कहती है कि नाव से ही आते जाते हैं। अभी भी घर की आवश्यक सामग्री खरीदकर ला रहे हंै। परिवार में 15 सदस्य हैं। पिंका बताती है कि कोई हमारी समस्या देखने वाले नहीं है। हम अपने स्तर पर इंतजाम कर रहे हैं। ऐसे ही हाल काकनसेजा में भी कुछ मकान इन दिनों जल के घेरे में है।

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