
सरकारी शिक्षकों के प्रशिक्षण के नाम पर 61 करोड़ खर्च, इतनी राशि से पूरे प्रदेश की स्कूलों में बन सकते थे दो हजार कक्षा-कक्ष
बांसवाड़ा. सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए सरकार इस सत्र में 60 करोड़ 84 लाख 400 रुपए खर्च कर रही है। निष्ठा प्रशिक्षण जुलाई में शुरू हुआ। अब तक पांच चरण पूरे हो चुके हैं, जिसका आखिरी 11वां चरण में जनवरी है। इस प्रशिक्षण में पूरे प्रदेश से 2 लाख 41 हजार 101 शिक्षक भाग लेंगे। वहीं सरकारी स्कूलों में कक्षा कक्ष निर्माण को लेकर सरकार के पास फंड नहीं है। वहीं दूसरी ओर देखें तो इस राशि से पूरे प्रदेश में 2 हजार से ज्यादा कक्ष कक्ष का निर्माण हो सकता था, जिससे काफी हद तक स्कूलों में बच्चों के बैठने की समस्या समाप्त हो जाती। बांसवाड़ा जिले की बात करें तो यहां पर वर्तमान में 610 ऐसी स्कूलें हैं, जहां पर दो से अधिक कक्षा कक्ष की तत्काल आवश्यकता है।
प्रति शिक्षक एक दिन में 500 रुपए : - एक शिक्षक को प्रशिक्षण काल के दौरान 500 रुपए की राशि तय की गई है। यह राशि समग्र शिक्षा अभियान की ओर से देय है। वहीं पांच दिन के प्रशिक्षण में प्रति शिक्षक 2500 रुपए की राशि बनती है। यदि प्रदेश में 2 लाख 41 हजार 101 शिक्षक के लिए राशि गिनी जाए 60 करोड़ 55 लाख 500 रुपए की राशि होती है। वहीं इन्हें पढ़ाने वाले केआरपी एक ब्लॉक में पांच नियुक्त हैं। प्रदेश में 325 ब्लॉक में 1625 केआरपी लगे हैं। जिन पर प्रतिदिन 700 रुपए व्यय है। इस तरह से केआरपी की कुल राशि पांच दिन की पूरे प्रदेश में 56 लाख 87 हजार 500 रुपए होती है। पूरे प्रशिक्षण में कुल 60 करोड़ 84 लाख 400 रुपए की राशि महज प्रशिक्षण पर खर्च हो रही है। इसके अलावा अन्य राशि जो स्थानीय स्तर पर बिल उठेंगे, वह अलग है। क्योंकि अधिकारियों का निरीक्षण, भत्ते और निरीक्षणकर्ताओं का मानदेय अलग से देय होगा।
35 की क्षमता, 3 लाख की राशि : - सामान्य रूप से एक कक्षा जिसकी क्षमता 35 बच्चों की हो तो उस पर तीन लाख रुपए की राशि खर्च आती है। इस तरह से प्रशिक्षण पर खर्च होने वाली कुल राशि के हिसाब से देखें तो 2018 कक्षा कक्ष का निर्माण उपरोक्त प्रशिक्षण राशि से निर्मित हो सकते हैं। सेवानिवृत्त डीईओ मोहनलाल पारगी का कहना है कि शिक्षक बनने के लिए सबसे पहले तो एसटीसी या बीएड, फिर टेट या रीट, भर्ती परीक्षा आदि में चयनित होने के बाद ही शिक्षक की नियुक्ति स्कूल में होती है। इसके बावजूद प्रशिक्षण पर करोड़ों रुपए खर्च करने का औचित्य क्या है। इस पर उच्चाधिकारी को सोचना चाहिए। समग्र शिक्षा अभियान के आयुक्त प्रदीप कुमार बोराड ने बताया कि यह केंद्र सरकार का प्रोजेक्ट है और केंद्र सरकार हर एक प्रोजेक्ट के लिए फंड तय करती है। इसलिए उसकी गाइड लाइन अनुसार यह प्रशिक्षण करना होता है। विद्यालय में सुविधाओं की बात है तो यह दूसरा मामला है। इसके लिए भी हम लगातार प्रयास कर रहे है।
Published on:
02 Dec 2019 12:37 pm
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