
बांसवाड़ा पुलिस महकमे में आशियानों का खण्डहर
पुलिस महकमे में आशियानों का खण्डहर
नरेन्द्र वर्मा@ बांसवाड़ा। छह दशक पुराने राजस्थान पुलिस के बांसवाड़ा रिजर्व पुलिस लाइन में एक दो नहीं वरन सौ से अधिक आवास खण्डहर के ढेर से घिरे है। नौ साल पूर्व नकारा घोषित हो चुके जवानों के यह आवास पूर्ण रूप से ध्वंस्त नहीं होने से रिजर्व पुलिस लाइन में एक जंगल खड़ा किए हुए है। ऐसे में यहां जहरीली जीव जन्तुओं के साथ ही वीरानी पसरी हुई है। लाइन में बसे जवानों व उनके परिवारों के लिए यह वीरानी किसी सनसनी से कम साबित नहीं हो रही है। हालांकि जिला पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना रिजर्व पुलिस लाइन की काया पलट एवं खण्डहरों पर बुलडोजर फिराने के पूरे प्रयास में जुटे हुए है, लेकिन सरकारी पेचदेगियां राह में रोडा ही बने हुए है।
बांसवाड़ा शहर का इतिहास सालों पुराना है। यहां स्थापित रिजर्व पुलिस लाइन की उम्र भी करीब 60 साल की हो चुकी है। रिटायर्ड पुलिस अफसर व जवान बताते है कि रिजर्व पुलिस लाइन पहले मौजूदा राज तालाब पुलिस थाना के पुराने चौकी भवन में हुआ करती थी। शहर का विकास एवं विस्तार हुआ तो दाहोद रोड पर वर्ष 1968 में 118. आठ बिस्वा में नई रिजर्व पुलिस लाइन भवन स्थापित की गई। यहां जवानों व अफसरों की संख्या बढ़ती गई तो आवासों का आंकड़ा भी बढ़ता गया। यहां 70 के दशक में बने 115 आवास अब पूरी तरह से खण्डहर हो चुके है।
दो दशक से वीरानी का साया
लाइन में खण्डहर हुए 115 आवासों के कबाड़ होने के बाद इन्हें खाली करवा लिए गए है। करीब दो दशक से यह आवास वीरान पड़े है। यहां किवाड़ व दरवाजे हटाए जाने के बाद यहां जंगल पसर गया है। कई आवास कंटीली झाडि़यों से घिर आए है। कभी परिवारों की खिलखिलाहट से गूंजायमान रहने वाले आवासों की राहें अब सूनी हो चुकी है। यहां लाइन की कॉलोनी में बसे परिवार अब इस तरफ जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते है। क्यूंकि यह सभी आवास व आसपास का क्षेत्र वीरान हो चुका है। यहां जंगली व जहरीली जीवों ने अपना घर बसा लिया है। इतना ही नहीं खण्डर हुए आवासों की जर्जर हुई छतें व दीवारें भी स्वत: ढहने लगी है।
कमेटी गठित, लेकिन कार्रवाई नहीं
जिला कलक्टर के निर्देश पर सार्वजनिक निर्माण विभाग खण्डहर हुए आवासों का भौतिक सर्वे कर चुकी है। अधिशासी अभियंता की तरफ से 5 फरवरी 2013 को जिला कलक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि यह आवास अब मरम्मत योग्य भी नहीं रहे है। इसी रिपोर्ट के आधार पर कलक्टर ने 22 जुलाई 2019 को चार सदस्यीय प्रशासनिक समिति का गठन किया। यह समिति भी खण्डहर हुए सभी 115 आवासों को ध्वंस्त करने और इनके स्थान पर नए आवास गृहों का निर्माण कराने की अनुशंसा कर चुकी है। निर्माण विभाग ने भी करीब सोलह करोड़ की कार्य योजना बना दी है। जिला पुलिस अधीक्षक ने यह प्रस्ताव सरकार को भिजवा रखे हैं, लेकिन तीन साल में कुछ नहीं हो सका।
144 आवास में है परिवार
लाइन में अभी कुल 144 आवास है। इनमें अधिकांश आवास मंंजिला है। करीब तीन सौ परिवार यहां बसे है। इन परिवारों के लिए यह खण्डहर हुए मकान किसी भूतिया महलों से कम साबित नहीं हो रहे है। परिवार के लोग खास कर बच्चे व महिलाएं तो सांझ ढलते ही इन खण्डहरों की तरफ जाने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते है।
रोड, लाइट व बिजली का संकट
कॉलोनी के परिवार बताते है कि यहां कॉलोनी में सड़क ही नहीं है। सालों पुरानी पगड़डी पर जगह-जगह कंकरीट उभर आई है। कइर् जगह तो गड्ढे पसरे हुए है। कुछेक जगह पर तो बरसाती पाली भरा रहता है। आवासीय कॉलोनी में रोड लाइट भी नहीं है। खण्डहरों के कारण लाइन में ही जंगल पसरा हुआ है। रात में जहरीले जीव घूमते रहते है। आने जाने में भी परेशानी होती है। उनकी पीड़ा यह भी है कि कॉलोनी में जलदाय विभाग ने अभी तक पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन ही नहीं बिछाए है। पुलिस अधीक्षक के प्रयासों से ही महकमा निजी स्तर पर पानी की व्यवस्था बोरिंग व हैंडपम्प के जरिए किए हुए है।
मुख्यालय को भिजवा रखा प्रस्ताव
रिजर्व पुलिस लाइन में खण्डहर हुए आवासों में अब कोई परिवार नहीं रहता है। इन्हें पूर्ण रूप से ध्वंस्त करने के लिए विभागीय प्रक्रिया जारी है। सरकार व मुख्यालय को भी प्रस्ताव भिजवा रखे हैं। ध्वंस्ती की कार्रवाई के बाद भूमि के उपयोग के लिए अलग से कार्य योजना बनाई जाएगी। लाइन में अभी पर्याप्त संख्या में आवास है। यहां की मूलभूत सुविधाओं में भी बेहतर सुधार होगा।
- राजेश कुमार मीना, जिला पुलिस अधीक्षक, बांसवाड़ा
Published on:
27 Sept 2022 05:17 pm
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