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राजस्थान का रण : विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता खामोश, तस्वीर धुंधली, तय नहीं ऊंट किस करवट बैठेगा

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राजस्थान का रण : विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता खामोश, तस्वीर धुंधली, तय नहीं ऊंट किस करवट बैठेगा

वरुण भट्ट. बांसवाड़ा. आदिवासियों की शहादत स्थली मानगढ़ धाम बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र का ही एक हिस्सा है। गुजरात सीमा से सटे कई गांवों के लोगों का रोजमर्रा का कामकाज राजस्थान के साथ-साथ गुजरात पर भी निर्भर है। मुख्य रूप से रोजगार के लिए गुजरात पलायन आम बात है। अभी जब चुनावी मौसम है तो विधानसभा क्षेत्र में आमजन रोजमर्रा की भागदौड़ की जिन्दगी में कुछ इसकी चर्चा में भी मशगूल हैं। इस बार विधानसभा क्षेत्र में 283 मतदान केंद्र हंंै। सवा दो लाख से अधिक मतदाता हंै, जो इस बार प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। राजनीतिक मायनों में देखें तो इस विधानसभा सीट पर दोनों ही प्रमुख दलों का विशेष फोकस है। बागीदौरा विधानसभा क्षेत्र कांगे्रस का गढ़ रहा है।

हालांकि बाद के वर्षों में जनता दल का भी यहां प्रभाव रहा। 1977 में पहली बार जनता पार्टी का विधायक बना। 2008 के बाद इस क्षेत्र में जनता दल अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। वर्तमान में यहां से कांगे्रस ने पिछला चुनाव जीते महेंद्रजीतसिंह मालवीया को फिर टिकट दिया है, वहीं भाजपा ने पिछले चुनाव में प्रत्याशी रहे खेमराज गरासिया पर भरोसा जताया है। भाजपा यहां पहली बार कमल खिलाने एडी चोंटी का जोर लगा रही है, वहीं कांग्रेस जीत की हैट्रिक के प्रयास में हैं। इस बार नई पार्टी के रूप में भारतीय ट्राइबल पार्टी [ बीटीपी] भी पूरे दमखम के साथ मैदान में हैं और दोनों प्रमुख पार्टियों के वोट बैंक के सेंध लग जाय तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। सीट जनजाति बहुल है और जनजाति वोटों का समीकरण दलों की गणित गड़बड़ा सकता है। ऐसे में ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो परिणाम सामने आने पर ही पता चलेगा।

कभी थी निकटता, आज है दूरी
चुनाव में प्रतिद्वंद्वी के रूप में उतरने वाले मालवीया व खेमराज के बीच कभी निकटता थी। चर्चा यह भी है कि 2008 के विधानसभा चुनाव में गरासिया- मालवीया साथ-साथ थे। राजनीतिक लक्ष्य ने एक-दूसरे के बीच दूरियां बढ़ाई। नामांकन भरने के दौरान दोनों प्रत्याशियों की ओर से जुटाई गई भीड़ को देखकर भी लगता है कि मुकाबला इतना आसान नहीं है। दोनों प्रतिद्वंद्वी कभी नजदीकियों के चलते एक-दूसरे की कमजोरियों से भी परिचित हैं। ऐसे में एक-दूसरे के दांव को देखकर ही अपनी चुनावी चाल चल रहे हैं।

मतदाताओं का ये मत
जो विकास का वादा करेगा, उसे ही हम तो इस बार वोट देंगे। गांव में साफ-सफाई सहित कई आवश्यकताएं हैं, जिन पर नेताओं को फोकस करना चाहिए।
प्रमिला टेलर, महिला मतदाता

ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं कौशल विकास के क्षेत्र में काम होने चाहिए। इनके लिए राज्य स्तर पर पार्टियों की नीतियां जनता के लिए कैसी रहती हैं, इसका आंकलन कर समझ के साथ मतदान करुंगा।
कुंजन प्रजापति, युवा मतदाता


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