
बांसवाड़ा @6 डिग्री : दिसम्बर में सर्दी के तेवरों ने किया कनफ्यूज, इंसानों के साथ वनस्पतियों पर भी पड़ रहा असर
सुधीर भटनागर/बांसवाड़ा. जिले में सर्दी ने पिछले साल जिस तरह नया स्वभाव दिखाकर दशकों का कीर्तिमान तोड़ा था, वैसे तेवर इस बार नजर नहीं आ रहे हैं। तेज सर्दी के इस महीने में बार बार उतार- चढ़ाव के साथ ही अधिकतम और न्यूनतम पारे की बड़ी खाई के कारण मौसम के पल पल बदलते मिजाज से न केवल इंसान को बल्कि वनस्पति को भी ‘गुमराह’ हैं और इसका असर उनके जीवन चक्र पर पड़ रहा है। सर्द-गर्म से इंसान पर बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है तो पौधों की बढ़वार पर असर आ रहा है। सर्दी की दृष्टि से दिसंबर और जनवरी के महीने सबसे ज्यादा सर्दी वाले माने जाते हैं और पिछले साल इन दो महीनों में सबसे तेज सर्दी [दस डिग्री से कम] के पचास दिन रहे थे जो कई शकों में नहंीं रहे थे, लेकिन इस वर्ष दिसम्बर में वैसा व्यवहार नजर नहीं आ पाया है। दिसंबर पूरा होने में सिर्फ चार दिन बचे हैं और अब तक दस डिग्री सेल्सियस से कम का तापमान सिर्फ तीन दिन 17 दिसंबर को 9.8, 18 दिसंबर को 9.5 और 27 दिसंबर को 6.2 डिग्री सेल्सियस रहा। अगले तीन दिन पारा और दस डिग्री व उसके नीचे रहने के आसार हैं। इस तरह कुल छह दिन ही होंगे। जबकि वर्ष 2018-19 में दिसंबर में 19 दिन पारा दस डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा था और उसमें भी 29 दिसम्बर को 3.3 और 28 दिसम्बर को 4.0 डिग्री सेल्सियय तक लुढक़ा था। इस बार सर्दी के ये मिजाज देखने को नहीं मिले। इस मौसम में अब तक न्यूनतम पारा 6.2 डिग्री तक आया है। इस बार दिसम्बर के पहले पखवाड़े में अधिकतम तापमान 25.6 से 29.5 डिग्री सेल्सियस के बीच घटता बढ़ता रहा वहीं रात का पारा भी इस अवधि में 12 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच चला। माह के दूसरे पखवाड़़े में सर्दी का जोर बढ़ा और रात का पारा 15.5 डिग्री से लेकर 6.2 डिग्री तक गया तो दिन का तापमान में 23 से 28.0 डिग्री के बीच झूला। इस तरह गर्मी जैसे तेवर दिखे तो सर्दी ने भी असर दिखाया।
मौसम की सबसे सर्द रात : - जिले में शुक्रवार की रात इस मौसम की सबसे सर्द रात रही। कृषि अनुसंधान केन्द्र बोरवट के तापमापी पर न्यूनतम तापमान 6.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जो गुरुवार के मुकाबले 3.9 डिग्री कम है। हालांकि दिन का तापमान 0.2 ड्रिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 24.8 डिग्री रहा। शहरी इलाके में रात का पारा 7 डिग्री और दिन का परा 27 डिग्री दर्ज हुआ। इस महीने के मौसम और तापमान को लेकर दो बातें अहम रही। एक तो दिन और रात के पारे में अंतर काफी रहा और हर एक दो दिन में मौसम और पारे में बदलाव होता रहा जिसका असर इंसान के साथ वनस्पति पर रहा है। पिछले साल दिसम्बर और जनवरी में लगातार अच्छी सर्दी के कारण गेहूं के लिए अनुकूल परिस्थितियां रहीं और बम्पर उत्पादन हुआ, लेकिन इस बार अब तक मौसम का व्यवहार ऐसा नहीं रहा है। गेहूं की फसल को ही देखें तो उसे इस समय अच्छी सर्दी की जरूरत है, लेकिन क्लाइमेट में बार बार बदलाव से गेहूं के लिए भी कनफ्यूज होने की स्थिति है। एक दिन अच्छी सर्दी पर पौधा जड़ फैलाने की ओर अग्रसर होता है तो अगले ही दिन ऊंचा तापमान पाकर वह फूल खिलाने की ओर बढ़ता है। मामले में कृषि अनुसंधान केंद्र बोरवट के संभागीय निदेशक डॉ. पी.के. रोकडिय़ा ने बताया कि क्लाइमेट में बार बार बदलाव और तापमान में उतार चढ़ाव से नुकसान की स्थिति बनी है। इसका असर उत्पादन और गुणवत्ता पर आ सकता है।
Published on:
28 Dec 2019 02:11 pm
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