
Video : विश्व आदिवासी दिवस : उत्साह से झूमा आदिवासी मन, गेर में थिरके कदम, बिखरे संस्कृति के रंग
बांसवाड़ा. विश्व आदिवासी दिवस जिलेभर में उत्साह से मनाया गया। जिला मुख्यालय पर मुख्य समारोह कलक्ट्री परिसर स्थित जनजाति भवन में आयोजित हुआ, जिसमें सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संकल्प दिलाया गया। शहर में आदिवासी कलाकारों ने जमकर गेर खेली और डीजे की धुन पर थिरके। इसके अतिरिक्त विभिन्न संस्थाओं की ओर से कार्यक्रमों के आयोजन हुए। दोपहर में विभिन्न गांवों से आए जनप्रतिनिधि और आदिवासी कलाकार गांधीमूर्ति पर एकत्रित हुए, जहां पंचायतीराज राज्यमंत्री धनसिंह रावत, कलक्टर भगवतीप्रसाद, पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत, अतिरिक्त कलक्टर हिम्मतसिंह बारहठ आदि की मौजूदगी में कलाकारों ने परम्परागत वेशभूषा में लोक वाद्य यंत्रों की धुन पर जमकर गेर खेली। बाद में डीजे की धुन पर नाचते-गाते कलक्ट्री चौराहे पहुंचे। यहां जनजाति भवन परिसर में कलाकारों ने करीब आधे घंटे तक पुन: गेर खेली। इस दौरान कलाकारों का उत्साह देखते ही बना।
समय बदलाव का, खुद को बदलें
जनजाति भवन सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राज्यमंत्री रावत ने कहा कि आज के दिन विश्व ने हमें पहचान दी। वहीं मुख्यमंत्री ने टीएसपी क्षेत्र में अवकाश की घोषणा कर सम्मान किया है, ताकि इसे हम उत्सव के रूप में मना सकें। उन्होंने कहा कि वर्षों से पिछड़े रहने वाले आदिवासियों के स्तर में बदलाव आया है, लेकिन हमें अब भी खुद को बदलना होगा। मौताणा, डायन, डाम, शराबखोरी जैसी कुरीतियों से मुक्ति पानी होगी। बीमारी का उपचार भोपों की बजाय अस्पताल में कराएं। उन्होंने शराब छोडऩे का आह्वान कर कहा कि रामकॉलोनी, पीपलोद व भवानपुरा में कई ऐसे उदाहरण हैं, जिनमें लोग शराब के चक्कर में बरबाद हो गए। शराबखोरी से छुटकारा दिलाने में महिलाओं की भूमिका अहम है।
कांगे्रस ने नहीं उठाए कदम
केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए रावत ने कहा कि आज महिला के गर्भवती होने के साथ ही उसके स्वास्थ्य को लेकर सरकार राशि दे रही है, ताकि बच्चा कुपोषित नहीं हो। देश में 60 साल कांगे्रस ने राज किया, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी भी कभी राजा रहे, लेकिन शिक्षा के अभाव में इतिहास में उनके नाम ही नहीं हैं।
कुप्रथाओं का उन्मूलन करें
समारोह में कलक्टर भगवतीप्रसाद ने मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया। साथ ही संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज को मौताणा, डाम, गुटखा सेवन जैसी बुराइयों का उन्मूलन करना होगा। शिक्षा के प्रति अभिभावक जागरूक बनें। सरकार की योजनाओं का लाभ उठाएं। पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत ने विश्व आदिवासी दिवस मनाए जाने के इतिहास पर जानकारी देते हुए बताया कि इस दिवस का उद्देश्य आदिवासियों में शिक्षा का विकास और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण करना है।
इनका किया सम्मान
कार्यक्रम में अतिथियों ने बोरवट की छात्रा चंदा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया, वहीं प्रसूति सहायता योजना की लाभार्थी चंपा नलदा, करण बोरखाबर, वासुड़ी बोरखेड़ा, कौशल विकास के तहत गणेश, पीएम आवास के तहत हुकी, थावरी नवागांव, कला, इतरी, काली लीमथान, कमला खेड़ावड़लीपाड़ा, इंदिरा वीरपुर और सीता भापोर को प्रमाण पत्र दिए। आंबापुरा सरपंच सत्यनारायण ने जनजाति महापुरुषों के बारे में जानकारी दी।आरंभ में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के परियोजना अधिकारी विजयेश पंड्या ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में भाजपा उपाध्यक्ष योगेश जोशी, मनोहर पटेल, प्रधान दूधालाल मईड़ा भी मंचासीन रहे। संचालन अतिरिक्त कलक्टर हिम्मतसिंह बारहठ ने किया।
Published on:
10 Aug 2018 01:42 pm
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