हरनावदाशाहजी. क्षेत्र में इन दिनों अफीम काश्तकारों की नींद उड़ी हुई हुई है। चिराई के लिए तैयार हो चुकी फसल के डोडों में कई काश्तकारों ने चीरा लगाने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में किसानों के परिवार सहित डेरे खेतों में जम गए हैं और फसल की सुरक्षा को लेकर दिनरात की चौकसी में मुस्तैद नजर आने लगे हैं। जबकि कई काश्तकारों की फसल रोगग्रस्त होने के चलते वे उसमें चीरा लगाने को लेकर अभी पसोपेश में हैं। क्षेत्र में इस बार सौ से अधिक काश्तकारों को अफीम काश्त के लाइसेंस मिले हैं। ज्यादातर काश्तकारों के समय पर बुवाई एवं अच्छे मौसम से उम्मीद जगी, लेकिन बीच बीच में बदलते मौसम के कारण फसल में पीलिया रोग के प्रकोप ने फसल को प्रभावित किया। इससे जिससे अफीम उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि कई काश्तकारों ने डोडों की चिराई के साथ अफीम पोंछने का काम शुरू कर दिया। ऐसे में घर बाजार से लेकर रिश्तेदारी तक के काम छोड़ दिए हैं। काश्तकार दूलीचंद लोधा, हेमराज लोधा ने बताया कि अफीम की बुवाई से लेकर पैदावार लेने तक पांच महीने कड़ी मेहनत करनी पडती है। इसमें डोडों को चीरा लगने के समय तो मरण हो या परण, अधूरा काम छोड़कर किसी कार्यक्रम में नहीं आ-जा सकते।