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नहीं पहुंची एंबुलेंस, आदिवासी महिला ने दिया नवजात को जन्म

अस्पताल के वार्ड में पहुंचने से पहले ही प्रसूता सोना ने उप जिला अस्पताल परिसर में दूध की गाड़ी में ही एक बच्ची को जन्म दिया।

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बारां

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Mukesh Gaur

Nov 26, 2025

अस्पताल के वार्ड में पहुंचने से पहले ही प्रसूता सोना ने उप जिला अस्पताल परिसर में दूध की गाड़ी में ही एक बच्ची को जन्म दिया।

अस्पताल के वार्ड में पहुंचने से पहले ही प्रसूता सोना ने उप जिला अस्पताल परिसर में दूध की गाड़ी में ही एक बच्ची को जन्म दिया।

दूध ले जाने वाले वाहन में हुआ प्रसव, मां और शिशु दोनों स्वस्थ

केलवाड़ा. आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करने वाली एक घटना सामने आई है, सूखा सेमली की एक गर्भवती महिला, सोना सहरिया की तबीयत उस समय बिगड गई, •ाब एम्बुलेंस नहीं पहुंचने के कारण उसे दोपहिया वाहन से परिजन उप जिला अस्पताल केलवाड़ा ला रहे थे। प्रसव पीड़ा के दौरान रास्ते मे दोपहिया वाहन रोका, महिला सडक़ के बीच में ही दर्द से तड़प उठी और तभी प्रसव की शुरूआत हो गई। इस बीच आने-जाने वाले वाहनों से प्रसूता के परिजन गुहार लगा रहे थे, लेकिन कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। तभी इस गंभीर स्थिति में, केलवाड़ा के दो युवक सुनील शाक्यवाल और कैलाश राठौर उसी रास्ते से गुजर रहे थे। उन्होंने मानवता का परिचय देते हुए अपनी जान-पहचान के दूध व्यवसाईं की गाड़ी रुकवाई और सोना सहरिया को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के वार्ड में पहुंचने से पहले ही प्रसूता सोना ने उप जिला अस्पताल परिसर में दूध की गाड़ी में ही एक बच्ची को जन्म दिया। यह घटना आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सुविधाओं की समय पर उपलब्धता की कमी को उजागर करती है। यदि समय पर प्रसूता अस्पताल नहीं पहुंचती तो मां-और बच्चे दोनों को नुकसान की आशंका थी। प्रसूता के परिजनों दोनों युवक सुनील शाक्यवाल एवं कैलाश राठौर को धन्यवाद दिया उनकी वजह से एक घटना घटित होने बच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए केलवाड़ा अस्पताल के कर्मचारियों ने तुरंत सोना की देखभाल शुरू की चिकित्सक डॉ.अमित भारतीय ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों खतरे से बाहर हैं।