
समझाइश के बाद हुआ रेस्क्यू (फोटो: पत्रिका)
बारां के छबड़ा क्षेत्र के गांव बमोरा में एक घटना कौतूहल का विषय बन गई। यहां एक मकान में निकले नाग का रेस्क्यू करने पहुंची वन विभाग की टीम को महिला-पुरुषों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने सांप को देवता मानकर पूजा-अर्चना शुरू कर दी थी। रेंजर की समझाइश के उपरांत नाग का सफल रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया।
बमोरा गांव में सूचना पाकर मौके पर पहुंची वन विभाग टीम उस समय आश्चर्यचकित रह गई जब चौथमल नागर के मकान के बाहर बडी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा थी। अंदर जाकर देखा तो मकान के एक कोने में बैठे हुए नाग के सामने अगरबत्ती लगी हुई थी व दूध रखा हुआ था।
इस पर रेंजर भारत राठौड़ ने सांप का रेस्क्यू करने के लिए ग्रामीण को काफी समझाने का प्रयास किया, किंतु नहीं माने। बाद में ग्रामीणों व रेंजर की समझाइश के उपरांत ग्रामीण रेस्क्यू को राजी हुए। इस पर टीम ने सांप का रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा। कार्यवाही में वनपाल जितेंद्र सहरिया, वनरक्षक बलराम सहरिया, वन्यजीव प्रेमी चन्दू यादव, विक्की सहरिया आदि मौजूद थे।
वहीं कवाई छोटे तालाब के बीच फंसे एक गोवंश का गोरक्षक समिति के युवाओं ने तैराकों की सहायता से रेस्क्यू किया। यहां सिंचाई विभाग ने चारों तरफ चारदीवारी बनवा रखी है। यहां पर दो घाट पूरी तरह से खुले हैं। ऐसे में एक गाय इस तालाब में गिर गई। हिंदू धार्मिक सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि इस पर समिति के सदस्य विष्णु चक्रधारी, दीक्षांत मंडिया, नरेंद्र सुमन पंहुचे।
तैराक गिर्राज महावर व करण महावर को बुलाया। दोनों ने गोवंश को कड़ी मशक्कत से रेस्क्यू कर किनारे पंहुचाया। जहां टीम के सदस्यों ने गोवंश को तालाब के बाहर निकाला। समिति ने उपचार कर उसे सुरक्षित स्थान पर पंहुचाया, जहां समिति की देखरेख में उसका उपचार किया जा रहा है। रेस्क्यू के दौरान समिति सदस्य विष्णु, दीक्षांत मंडिया, गौरव नामदेव, मनोज पोटर, गिर्राज करण महावर, नरेंद्र सुमन सहित अन्य सदस्यों ने मदद की।
Published on:
01 Aug 2025 01:11 pm
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