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बच्चों में डायबिटिज की बीमारी, राह ताक रहा क्लीनिक ‘मधुहारी’

अस्पतालों में डायबिटीज टाइप-1 मरीजों को चिन्हित करने और उनका स्तरीय इलाज शुरू करने के लिए मिशन मधुहारी शुरू किया गया। इसके तहत जिला अस्पताल में भी मधुहारी क्लिनिक खोला गया, लेकिन यहां मरीज नहीं पहुंच रहे है।

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बारां

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Mukesh Gaur

Jun 09, 2025

अस्पतालों में डायबिटीज टाइप-1 मरीजों को चिन्हित करने और उनका स्तरीय इलाज शुरू करने के लिए मिशन मधुहारी शुरू किया गया। इसके तहत जिला अस्पताल में भी मधुहारी क्लिनिक खोला गया, लेकिन यहां मरीज नहीं पहुंच रहे है।

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अस्पताल नहीं पहुंच रहे टाइप-1 के मरीज

बारां. सरकार की ओर से बचपन और स्वस्थ भावी भविष्य निर्माण को लेकर विशेष प्रयास किए जा रहे है। कई नवाचार भी किए जा रहे है, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी के चलते अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। हाल ही में राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के अस्पतालों में डायबिटीज टाइप-1 मरीजों को चिन्हित करने और उनका स्तरीय इलाज शुरू करने के लिए मिशन मधुहारी शुरू किया गया। इसके तहत जिला अस्पताल में भी मधुहारी क्लिनिक खोला गया, लेकिन यहां मरीज नहीं पहुंच रहे है। बीते करीब एक माह में गिनती के 30 मरीज ही पंजीकृत हुए है।

जिला अस्पताल के कमरा नंबर ३० में मधुहारी क्लिनिक संचालित है। यहां मिशन मधुहारी के तहत टाइप-1 मधुमेह से ग्रस्त 18 वर्ष की आयु तक के किशोर-किशोरियों के हैल्थ फॉलोअप, नियमित उपचार और दवा वितरण का कार्य माह के हर शुक्रवार को किया जा रहा है। क्लिनिक पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. गिरिराज मीणा व एमडी मेडिसिन डॉ. हंसराज सुमन को नियुुक्त किया गया है। विशेषज्ञ चिकित्सक टाइप-1 मधुमेह से ग्रस्त बच्चों की जांच कर निशुल्क इंसुलिन, ग्लूको मीटर तथा ग्लूको स्ट्रिप निशुल्क मुहैया करवाई जा रही है।

किससे ज्यादा खतरा

दोनों ही डायबिटीज खतरनाक हो सकती हैं और जटिलताएं पैदा कर सकती हैं। टाइप 1 डायबिटीज के लिए आजीवन इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है। टाइप 2 डायबिटीज को जीवनशैली में बदलाव और आहार से नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। इस तरह दोनों ही प्रकार के डायबिटीज को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।

अभी के परिवेश में बच्चों में टाइप वन डायबिटिज के केस बढ़ रहे हैं। इसके मुख्य कारण अज्ञात है। फिर भी कुपोषित बच्चों में, पोस्ट वायरल इंफेक्शन में अधिक संभावना रहती हैं । इसके मुख्य लक्षण अधिक प्यास लगना, बार बार पेशाब आना, अधिक भूख लगना व वजन कम होना है। साथ ही चिड़चिड़ापन मुख्य लक्षण है। राजस्थान सरकार ने इनके सुचारू इलाज के लिए मधुहारी क्लिनिक शुरू किया है, जो सरकारी अस्पताल में प्रत्येक शुक्रवार को संचालित है।

डॉ गिरिराज मीना, वरिष्ठ नवजात व शिशु रोग विशेषज्ञ, (सहायक आचार्य), मेडिकल कॉलेज, बारां

यह ऑटोइम्यून डिजीज है। कारणों का पता लगना जटिल है। क्योंकि बचपन से किशोरावस्था तक कई बार वायरल हो जाता है। किसी भी वायरल से एंटी बॉडी बन जाती है। सैनिक बीटा सेल्स के खिलाफ लड़ते रहते हैं तो एक स्थिति आती है, तब सभी बीटा सेल्स $खत्म हो जाती है। थॉयरायड में थायरॉक्सिन बनाने वाली सेल्स से थायरॉक्सिन बनना बंद हो जाता है तो हाइपोथिरॉयडिज्म बीमारी हो जाती है। इसी तरह इसमें टाइप-1 डायबिटिज हो जाती है। जीवनभर इंसुलीन लेना ही उपचार है।

डॉ. हंसराज सुमन, एमडी मेडिसिन, आचार्य मेडिकल कॉलेज, बारां