राजस्थान पंचायतीराज सेवा परिषद के घटक संगठन विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारियों के आन्दोलन के तहत बुधवार को शहर में सम्मान, सुरक्षा आक्रोश रैली निकाली गई। इसमें शामिल अधिकारी व कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिषद की आक्रोश रैली पंचायत समिति बारां से प्रारम्भ होकर चारमूर्ति चौराह, प्रताप चौक व दीनदयाल पार्क होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पंहुच कर आम सभा में परिवर्तित हो गई।
बारां. राजस्थान पंचायतीराज सेवा परिषद के घटक संगठन विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारियों के आन्दोलन के तहत बुधवार को शहर में सम्मान, सुरक्षा आक्रोश रैली निकाली गई। इसमें शामिल अधिकारी व कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिषद की आक्रोश रैली पंचायत समिति बारां से प्रारम्भ होकर चारमूर्ति चौराह, प्रताप चौक व दीनदयाल पार्क होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पंहुच कर आम सभा में परिवर्तित हो गई।
Read more: झंझा रोहण के साथ मेले का उद्घाटन, बारां के डोल मेले की देश ही नहीं परदेस में भी है ख्याति
रैली को सम्बोधित करते हुये राजस्थान विकास सेवा के जिलाध्यक्ष दिवाकर मीणा, पंचायत प्रसार अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष रविन्द्र कुमार शर्मा एवं ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र सक्सेना ने कहा कि पंचायतीराज सेवा परिषद का कैडर स्ट्रेन्थ एवं वेतन विसंगति की मांगों के आदेश जब तक सरकार द्वारा जारी नहीं किए जाते तब तक पंचायतीराज सेवा परिषद का आन्दोलन जारी रहेगा। सेवा परिषद के शैलेश रंजन, पंचायत प्रसार अधिकारी संघ के कमल किशोर बैरवा, ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिला मंत्री नवल किशोर शर्मा ने बताया कि आन्दोलन को गति देते हुए जयपुर में 2 अक्टूबर को महापड़ाव एवं आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। जिसमें प्रदेश के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहेंगे। आमसभा के बाद परिषद के प्रतिनिधि मण्डल ने जिला कलक्टर को ग्यारह सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। रैली में जिले के समस्त विकास अधिकारी, पंचायत प्रसार अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी सहित 150 कर्मचारी शामिल रहे।
इनका आंदोलन भी जारी
अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की ओर से राज्य सरकार के साथ 30 अगस्त व 4 सितम्बर को हुए लिखित समझौतों की पालना के लिए राज्य कर्मचारियों का आन्दोलन जारी है। महासंघ के जिलाध्यक्ष रामप्रसाद नागर व महामन्त्री भूपेन्द्र माथोडिय़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण विकास व पंचायतीराज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की अध्यक्षता में गठित मंत्रालयिक उपसमिति में सभी विभागों की लिखित सिफारिशें की गई हैं। अब राज्य सरकार वार्ता में उलझाकर कर्मचारियों का आन्दोलन में ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही हैं। लिखित समझौतों की पालना नहीं की गई तो राज्य के सात लाख कर्मचारी हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।