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मानसून 2026 में भी राजस्थान के इस जिले को नहीं मिलेगी राहत, 2011 में आ गई थी बाढ़, ₹24.39 करोड़ की योजना पेंडिंग

Monsoon 2026: बारां शहर में मानसून 2026 के दौरान भी जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है। लंबे समय से लंबित ₹24.39 करोड़ की बाढ़ नियंत्रण योजना अभी स्वीकृति प्रक्रिया में है, जिससे इस बार भी राहत मिलने की उम्मीद कम है।

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Heavy Rain Flood

बारां में बाढ़ की फाइल फोटो: पत्रिका

Rajasthan Development Work: बारां शहर के लोगों को मानसून 2026 में भी बरसात के दिनों में बाढ़ के पानी से जूझना पड़ सकता है। इसके समाधान के लिए पूर्व सरकारों द्वारा किए गए प्रयास भी राहत नहीं दे पाए। गत वर्ष जिला प्रशासन के निर्देशो पर नगर परिषद तथा सिंचाई विभाग द्वारा शहर को बाढ़ के पानी से बचाव के लिए कवायद शुरू की गई थी। जो कि अब तक भी परवान नहीं चढ़ पाई। जिसके चलते इस वर्ष भी लोगों को बरसात में परेशानी उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।

शहर को बाढ़ के पानी से बचाव व राहत देने के लिए वर्ष 2025 में नगर परिषद तथा सिंचाई विभाग ने संयुक्त रुप से सर्वे कर प्रपोजल तैयार कर राज्य सरकार को भिजवाए गए थे। जिसके तहत जारी की गई निविदा 30 अप्रेल 2026 को खोलकर 6 मई को 24.39 करोड के टेंडर स्वीकृति के लिए जयपुर भिजवाए गए है। जिसके चलते इस सीजन में तो कार्य शुरु होने की उम्मीद नगण्य हो गई है।

यह होने है कार्य

जारी किए गए टेंडर के तहत चारमूर्ति चौराहा से रोड के दोनों और नए नाले का निर्माण कार्य जो कि स्टेशन रोड, प्रताप चौक, मेन मार्केट धर्मादा चौराहा से फोरेस्ट नाले से जोड़ा जाएगा। वही दीनदयाल पार्क से भी दोनों ओर नालों का निर्माण कर प्रताप चौक के नालों से जोड़ा जाएगा। कोटा रोड पर सिविल लाइन्स तिराहे से नालों का निर्माण कर नलका फाटक होते हुए नलका नाले से जोड़ेगे। साथ ही रामनगर नाले की दीवारो को पक्का बनाए जाने का भी कार्य किया जाएगा।

शहर में 2007 एवं 11 में आई थी बाढ़

शहर में बरसात के पानी की निकासी की व्यवस्थित व्यवस्था नही होने के कारण थोड़ी सी बरसात में सडक़ो पर पानी का भराव हो जाता है। जिससे आमजन समेत व्यापारियो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर में वर्ष 2007 तथा 2011 में बाढ़ के हालात देखने को मिले, तब कई बस्तियां जलमग्न हो गई थी। वही सिविल लाइन्स क्षेत्र भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गया था। ऐसे में सर्किट हाउस तथा अधिकारियों के आवासो में भी पानी का भराव हो गया था।

आधी अधूरी मिली थी राहत

शहर को बाढ़ के पानी से बचाव के लिए वर्ष 2016 में सिंचाई विभाग ने शहर के बाहरी तथा अन्दरुनी बरसात के पानी की निकासी के लिए डायर्वजन चेनल की कवायद शुरु की इसके तहत शहर के नालों को पक्का करने का काम 150 करोड़ रुपए की लागत से शुरु किया। वर्ष 2018 में बाणगंगा नदी की चौड़ाई बढ़ाने के साथ ही किनारों को पक्का करवाया गया। पाठेड़ा तथा नलका नाले की चौड़ाई भी बढ़ाई गई। साथ ही फोरेस्ट नाले पर डायवर्जन चैनल की कवायद शुरु की गई थी, इसके तहत 2600 मीटर की लम्बाई में कोटा रोड पर आरओबी के समीप से ही अंडर ग्राउंड नाले का निर्माण करवाया गया।

इससे वन विभाग तथा कृषि उपज मंडी में अंडर ग्राउंड नाले के निर्माण के साथ ही शेष भाग खुला रखते हुए नलका नाले में पानी डायवर्ट करना था। लेकिन कृषि मंडी तथा नलका नाले के मध्य जमीन के भू स्वामियों ने न्यायालय में स्टे लगा दिए जाने के कारण करीब 720 मीटर के हिस्से में निर्माण नही हो सका।

अंडर कवर नाले के भेजे प्रस्ताव

सिंचाई विभाग ने इस समस्या से निजात पाने के लिए करीब एक वर्ष पूर्व शेष रहे 720 मीटर के हिस्से में अंडर ग्राउंड नाले के निर्माण को लेकर प्रपोजल तैयार कर भिजवाए गए है। सिंचाई विभाग के सूत्रो ने बताया कि इस मध्य जिन भू स्वामियो की जमीन आ रही है। उनकी अंडर ग्राउंड नाले को लेकर सहमति बनने की उम्मीद है।

शहर के प्रमुख दो मार्गो चारमूर्ति से धर्मादा चौराहा तथा दीनदयाल पार्क से प्रताप चौक एवं सिविल लाइन्स रोड पर नाले निर्माण समेत रामनगर नाले की दीवारो को पक्का करने के लिए करीब 24.39 करोड़ के कार्यो के टेंडर 6 मई को स्वीकृति के लिए जयपुर भिजवाए गए है। जिनके शीघ्र ही स्वीकृत होने की उम्मीद है। इसके बाद कार्य शुरू करवाया जाएगा।
महेन्द्र कुमार मीणा, अधिशाषी अभिन्यता, जल संसाधन विभाग, बारां