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अलाव लकड़ी की 28 फाइलें गायब: नगर निगम पर सवाल, कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए

नगर निगम के निर्माण विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सर्दियों में अलाव की लकड़ी की खरीद के लिए बनाई गई 28 फाइलें रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं।

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बरेली। नगर निगम के निर्माण विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। सर्दियों में अलाव की लकड़ी की खरीद के लिए बनाई गई 28 फाइलें रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं। ठेकेदार को भुगतान न होने और फाइलों के गायब होने की शिकायत कमिश्नर सौम्या अग्रवाल तक पहुंची, जिन्होंने नगरायुक्त से 26 नवंबर तक जांच रिपोर्ट मांगी है।

पिछले साल सर्दियों में जलाई गई थी लकड़ी

पिछले साल सर्दियों में भारी ठंड के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम ने अलाव के लिए लकड़ी की खरीद की। टेंडर प्रक्रिया के बिना, महावीर कंस्ट्रक्शन एंड जनरल ऑर्डर सप्लायर्स से लकड़ी खरीदी गई। फर्म के मालिक अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता डीके शुक्ला ने उन्हें आश्वासन दिया था कि आपूर्ति जारी रखें, और अतिरिक्त लकड़ी के लिए कुटेशन बनाकर भुगतान किया जाएगा। अमित अग्रवाल का कहना है कि 3 फरवरी 2024 तक लकड़ी की आपूर्ति पूरी कर दी गई थी। इसके बाद भुगतान के लिए 28 फाइलों की कुटेशन तैयार कर एई और जेई ने अपने हस्ताक्षर के साथ रिपोर्ट अधिशासी अभियंता को सौंप दी थी। लेकिन इसी दौरान डीके शुक्ला का स्थानांतरण लखनऊ मुख्यालय कर दिया गया। आरोप है कि वह कुटेशन की 28 फाइलें अपने साथ ले गए।

फाइलें गायब, जांच दबाने के आरोप

नगर निगम के निर्माण विभाग के इंजीनियरों पर एक-दूसरे को बचाने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच मुख्य अभियंता को सौंपी गई थी, लेकिन रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं की गई। फाइलों के गायब होने के बावजूद पुलिस में मुकदमा तक दर्ज नहीं किया गया। नगर निगम का निर्माण विभाग और उसके इंजीनियर इस मामले में टाल मटोल कर रहे हैं। लकड़ी का भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं दिखे रहे हैं।

कमिश्नर की सख्ती से बढ़ी हलचल

अमित अग्रवाल ने मामले की शिकायत सीएम पोर्टल पर की। इसके अलावा कमिश्नर सौम्या अग्रवाल से की। जिसके बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया। कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने नगरायुक्त से 26 नवंबर तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस निर्देश के बाद निर्माण विभाग में हलचल बढ़ गई है। फर्म के मालिक अमित कुमार ने नगरायुक्त को इस मामले की लिखित शिकायत दी थी, लेकिन जांच को दबाने की कोशिश की गई। अब जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा है, तो नगर निगम पर जवाबदेही बढ़ गई है।

घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद

कमिश्नर के आदेश के बाद, इस घोटाले की जांच में तेजी आने की उम्मीद है। अगर फाइलें गायब होने का सच सामने आता है, तो नगर निगम के कई अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं।