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आस्था का महाज्वार… रोज 42 हजार श्रद्धालुओं से पटी बरेली, मनौना धाम बना नया पावर सेंटर, रेलवे मालामाल

नाथ नगरी बरेली इन दिनों आस्था की लहरों में नहीं, बल्कि महाज्वार में डूबी है। देश के कोने-कोने से हर दिन 40 से 42 हजार श्रद्धालु बरेली पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि स्टेशन से लेकर सड़कों तक, हर तरफ भगवा-भक्ति और जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है।

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बरेली। नाथ नगरी बरेली इन दिनों आस्था की लहरों में नहीं, बल्कि महाज्वार में डूबी है। देश के कोने-कोने से हर दिन 40 से 42 हजार श्रद्धालु बरेली पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि स्टेशन से लेकर सड़कों तक, हर तरफ भगवा-भक्ति और जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। महज एक साल में ही श्रद्धालुओं की संख्या ने 10 हजार का उछाल मार दिया है और इसका सीधा फायदा रेलवे की तिजोरी को हो रहा है।

मनौना धाम बना आस्था का सुपरहिट सेंटर

बरेली आने वालों में सबसे बड़ा आकर्षण बनकर उभरा है मनौना धाम। आंकड़े बताते हैं कि बरेली पहुंचने वाले हर 10 में से 7 श्रद्धालु सीधे मनौना धाम का रुख कर रहे हैं। 7 नाथ मंदिर और दरगाह आला हजरत के बाद अब मनौना धाम ने बरेली की धार्मिक पहचान को एक नई धार दे दी है। पिछले साल तक रोजाना बरेली पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब 32 हजार थी। अब यह आंकड़ा 42 हजार के करीब पहुंच गया है। यानी हर दिन हजारों नए कदम बरेली की जमीन पर आस्था के साथ उतर रहे हैं। यह बढ़ोतरी साफ इशारा कर रही है कि बरेली अब छोटे धार्मिक शहर की सीमा तोड़ चुका है।

रेलवे की बल्ले-बल्ले, स्टेशन हुआ हाई अलर्ट

सीएमआई मो इमरान चिश्ती ने बताया श्रद्धालुओं की बाढ़ से रेलवे की आमदनी में जबरदस्त इजाफा हुआ है। भीड़ को संभालने के लिए बरेली जंक्शन पर 6 एटीबीएम मशीनें लगाई गई हैं और यात्रियों की सुविधाओं पर खास फोकस किया जा रहा है। स्टेशन अब सिर्फ सफर का पड़ाव नहीं, आस्था की पहली सीढ़ी बन गया है। नाथ नगरी बरेली में बीते एक साल में एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच चुके हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बता देता है कि बरेली अब धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मोटे अक्षरों में लिखा जाने लगा है।

दरगाह आला हजरत जहां आस्था सरहदें तोड़ देती है

बरेली की पहचान सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं है। दरगाह आला हजरत आज भी करोड़ों अकीदतमंदों के दिलों की धड़कन बनी हुई है। देश ही नहीं, विदेशों से भी जायरीन यहां चादर और दुआ लेकर पहुंचते हैं। उर्स और खास मौकों पर दरगाह का इलाका पूरी तरह आस्था के रंग में रंग जाता है। हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करती यह दरगाह बरेली की गंगा-जमुनी तहजीब की सबसे बड़ी पहचान है।

7 नाथ मंदिर… नाथ परंपरा की जीवित विरासत

बरेली के 7 नाथ मंदिरों में अलखनाथ, त्रिवटीनाथ, तपेश्वरनाथ, धूपेश्वरनाथ, बनखंडीनाथ, पशुपतिनाथ और मढ़ीनाथ मंदिर नाथ परंपरा की जीवंत पहचान हैं। इन मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगातार लंबी होती जा रही हैं। नाथ योगियों की परंपरा, साधना और इतिहास से जुड़े ये मंदिर अब धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। नाथ कॉरिडोर बनने के बाद इन मंदिरों तक पहुंच और सुविधाएं पहले से कहीं बेहतर हुई हैं।

अयोध्या-काशी के बाद अब बरेली की गूंज

अयोध्या और काशी के बाद अब बरेली भी आस्था के बड़े केंद्रों की कतार में खड़ा नजर आ रहा है। नाथ परंपरा से जुड़ा यह शहर अब विदेशी सैलानियों को भी अपनी ओर खींच रहा है, जो बरेली की बदलती तस्वीर की गवाही देता है। नाथ कॉरिडोर बनने के बाद बरेली की सूरत-सीरत दोनों बदल गई हैं। चौड़ी सड़कें, सजी हुई गलियां और बेहतर कनेक्टिविटी ने श्रद्धालुओं का अनुभव पूरी तरह बदल दिया है। इसका नतीजा ये रहा कि बीते एक साल में पर्यटकों की संख्या में करीब 20 फीसदी का उछाल आया है।

लाइट एंड साउंड शो में इतिहास बोलता है

नाथ नगरी में शुरू हुआ लाइट एंड साउंड शो श्रद्धालुओं को सिर्फ दिखाता नहीं, बल्कि इतिहास से जोड़ता है। आधुनिक तकनीक के जरिए नाथ परंपरा और बरेली की गौरवगाथा सुनाई जा रही है, जो लोगों को देर तक रोक लेती है। श्रद्धालुओं की इस रिकॉर्ड भीड़ ने बरेली की अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। होटल फुल हैं, ढाबों पर लाइनें लगी हैं, ऑटो-टैक्सी वालों के चेहरे खिले हुए हैं और छोटे दुकानदारों की दुकानें गुलजार हैं।

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